बुढ़ाना/मुजफ्फरनगर (शिखर समाचार)। रजिस्ट्री कार्यालयों में डिजिटल योजना लागू किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान वकीलों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को सौंपकर अपनी मांगों पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की।
ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी
बार अध्यक्ष सुरेशपाल वर्मा एवं महासचिव सुभाष राठी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की कलमबंद हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। महासचिव सुभाष राठी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निबंधन विभाग के कार्यों के निजीकरण तथा ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को अन्य प्राधिकरणों के माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया गया है, जो आमजन एवं इससे जुड़े हजारों लोगों के हितों के विपरीत है।
निजीकरण से आजीविका प्रभावित होने की जताई आशंका
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उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता और टाइपिस्ट जैसे रजिस्ट्री कार्य से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही निजी कंपनियों को यह कार्य दिए जाने पर मनमानी शुल्क वसूली और आम लोगों के शोषण की संभावना भी बढ़ जाएगी।
पूर्व व्यवस्था से निबंधन कार्य कराने की मांग
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अधिवक्ताओं ने मांग की कि ई-रजिस्ट्री एवं निबंधन संबंधी कार्यों को निजी हाथों में देने के बजाय पूर्व की भांति उपनिबंधक कार्यालयों के माध्यम से ही संचालित किया जाए। इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम कृष्णकांत विश्वकर्मा को सौंपा गया।
धरना-प्रदर्शन में अधिवक्ता अवध बिहारी गर्ग, शिवकुमार, अंकित शर्मा, विकास त्यागी, फिरोज मंसूरी, मोहिद मलिक, दीपक राठी, त्रिलोक सैनी, अजय कुमार, शिवम, कुलदीप, संदीप, संजीव कुमार सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।
