गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
446 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए कंपोजिट विद्यालय बाग राणप, लोनी में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के साथ पेरेंट्स-टीचर मीटिंग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव और विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्कर्ष (आईएएस, रैंक 32, वर्ष 2026) उपस्थित रहे। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी लोनी सर्वेश कुमार, हरनूर कौर (निपुण सेल), कल्पना यादव (एआरपी), रीना (एआरपी), प्रधानाध्यापिका इमराना सिद्दीकी और विद्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और पेरेंट्स-टीचर मीटिंग
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित अधिकारियों और अभिभावकों का मन मोह लिया। पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा 2025-26 उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
शिक्षा और प्रेरक संदेश
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव ने कहा कि शिक्षा समाज के विकास की आधारशिला है और प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना हमारा दायित्व है। वहीं उत्कर्ष (आईएएस) ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि सही मार्गदर्शन और निरंतर परिश्रम से हर बच्चा अपने जीवन में उच्चतम लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार ने विद्यालय और अभिभावकों के बीच सुदृढ़ संवाद को बच्चों की सफलता का आधार बताया।
आगामी सत्र और निर्देश
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आगामी सत्र 2026-27 के लिए निर्देश दिए:
- ग्राम स्तर पर प्रधानाध्यापक द्वारा आशा बहू, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम के साथ 3 वर्ष से अधिक आयु के सभी बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए।
- 6 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक बच्चे का कक्षा-1 में प्रवेश सुनिश्चित हो।
- कक्षा-5, कक्षा-8 और कक्षा-10 उत्तीर्ण बच्चों का क्रमशः कक्षा-6, कक्षा-9 और कक्षा-11 में नामांकन अनिवार्य किया जाए।
- आगामी “स्कूल चलो अभियान 2026-27” को केवल शासकीय कार्यक्रम न रहकर जन-आंदोलन बनाया जाए, जिसमें आमजन, अभिभावक, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाएं और विभिन्न विभागों का समन्वय स्थापित हो।
यह आयोजन शिक्षा के प्रति जनजागरूकता, सहभागिता और जिम्मेदारी का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। इसने यह संदेश दिया कि जब प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक मिलकर काम करते हैं, तो हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव और मजबूत होती ह
