नई दिल्ली (शिखर समाचार)
देश की पारंपरिक बुनाई और शिल्प विरासत को समर्पित विशेष हैंडलूम एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी ‘संरचना’ का भव्य आग़ाज़ जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में हो गया। नेशनल डिज़ाइन सेंटर के तत्वावधान में आयोजित इस एक्सपो की शुरुआत आकर्षक फैशन प्रस्तुति ‘भारत वीव्स’ के साथ की गई, जिसने आधुनिकता और परंपरा के अनूठे संगम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रदर्शनी 10 जनवरी से 18 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।
भारत वीव्स: पारंपरिक बुनाई और आधुनिक फैशन का संगम रैम्प पर
उद्घाटन अवसर पर प्रस्तुत ‘भारत वीव्स’ वस्त्र प्रस्तुति को सत्यम फैशन संस्थान के सहयोग से सृजित किया गया, जिसमें भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा को समकालीन दृष्टि के साथ मंच पर उतारा गया। दुल्हन परिधान संग्रह, फुलकारी आधारित वस्त्र, साड़ी श्रृंखला, खादी परिधान और पारंपरिक हथकरघा से निर्मित कार्यालयीन परिधानों ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा। रैम्प पर उतरे परिधानों में भारतीय बुनकरों की कलात्मक दक्षता, सूक्ष्म शिल्प और आधुनिक फैशन की सोच का संतुलित प्रतिबिंब साफ़ दिखाई दिया।
यह आयोजन विकास आयुक्त (हथकरघा), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय जूट बोर्ड, नाबार्ड तथा सत्यम फैशन संस्थान के सहयोग से संपन्न हो रहा है। प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की हस्तकला, हथकरघा और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ-साथ कारीगरों को व्यापक बाज़ार से जोड़ना है।
संरचना एक्सपो: देशभर के बुनकर और उत्पादक पेश कर रहे हस्तशिल्प और हथकरघा की विविधताएँ
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संरचना एक्सपो में आगंतुकों के लिए हस्तशिल्प वस्तुएँ, हथकरघा वस्त्र, जूट उत्पाद, गृह सज्जा सामग्री, उपहार सामग्री और विविध वस्त्रों की विशाल श्रृंखला उपलब्ध है। देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक प्रतिभागी जिनमें बुनकर, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियाँ और उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह मंच उन्हें ग्राहकों, थोक व्यापारियों, निर्यातकों और खरीदारों से सीधे संवाद का अवसर प्रदान कर रहा है।
प्रदर्शनी पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक उपभोक्ता रुचियों के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभर रही है। साथ ही, यह शहरी दर्शकों को भारतीय हथकरघा की विविधता, सांस्कृतिक गहराई और जीवंत परंपराओं से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रही है। नेशनल डिज़ाइन सेंटर की यह पहल न केवल भारत की बुनाई विरासत के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने और भारतीय हथकरघा उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की ओर भी एक ठोस प्रयास मानी जा रही है।
