टूटी सड़कों ने छीना शहर का चैन, हर कदम पर दुर्घटना का डर

Rashtriya Shikhar
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Broken roads have taken away the peace of the city; there is a fear of accidents at every step IMAGE CREDIT TO REPORTER

नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार) नगर की जीवनरेखा कही जाने वाली सड़कें आज खुद जीवन के लिए खतरा बनी हुई हैं। पिछले कई महीनों से शहर की अनेक प्रमुख सड़कों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि अब नागरिकों का पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। हालात यह हैं कि लगातार शिकायतों और आवाज़ उठने के बावजूद नगर पालिका परिषद अपने ही कार्यालय के सामने की सड़क तक को दुरुस्त नहीं करा सकी है। इससे आम जनता में गहरा रोष है।

उखड़ी सड़कों का आतंक: बदहाल मार्गों ने बढ़ाई आमजन की मुश्किलें

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नगर के मुख्य मार्गों पर जगह-जगह सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। कहीं अधूरे निर्माण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है तो कहीं महीनों से गड्ढे वैसे ही बने हुए हैं। अंबेडकर रोड और स्टेशन रोड को जोड़ने वाला मार्ग, जो कि अत्यंत व्यस्त मार्गों में गिना जाता है, आज बदहाली की मिसाल बन चुका है। नगर पालिका कार्यालय के सामने की सड़क पर उखड़े पत्थर, फैला मलबा और गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए रोज़ नई मुसीबत पैदा कर रहे हैं।

स्थिति यह है कि पैदल चलने वाले लोग ठोकर खाकर गिर रहे हैं, दोपहिया वाहन सवार असंतुलित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और चारपहिया वाहनों को निकालना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टूटे रास्तों पर चलकर कई लोग गंभीर रूप से घायल तक हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

जर्जर सड़कों पर अदृश्य प्रशासन: जिम्मेदारों की अनदेखी से बढ़ती परेशानी

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन सड़कों से रोज़ाना प्रशासनिक अधिकारी स्वयं गुजरते हैं, वही सड़कें सबसे ज्यादा जर्जर अवस्था में पड़ी हैं। इसके बावजूद न तो स्थायी मरम्मत कराई जा रही है और न ही कोई ठोस कार्ययोजना सामने आ रही है। नगरवासियों का आरोप है कि अधिकारी पूरी स्थिति से अवगत होने के बावजूद अनजान बने हुए हैं।

नगर के प्रबुद्ध नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक लोगों ने एक स्वर में नगर में टूटी व जर्जर पड़ी सड़कों को शीघ्र दुरुस्त कराने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अब शहरवासी इस इंतजार में हैं कि उनकी रोज़मर्रा की परेशानी कब सुनी जाएगी और कब उन्हें गड्ढों से मुक्त सुरक्षित सड़कें नसीब होंगी।

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