__विकास कार्यों के साथ शहर के सौंदर्यकरण पर नगर निगम का विशेष फोकस: महापौर सुनीता दयाल
आरव शर्मा
गाजियाबाद (शिखर समाचार)। शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों को सुंदर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में गाजियाबाद नगर निगम ने एक और शानदार पहल की है। महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में मेरठ रोड तिराहे पर फ्लाईओवर के नीचे करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े जंक्शन तैयार किए गए हैं। इस पूरे क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप देते हुए यहां 25 फीट ऊंचा विशाल त्रिशूल स्थापित किया गया है, जो इस समय शहरवासियों और बाहर से आने वाले मुसाफिरों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
ऐतिहासिक शिव मंदिर श्री दूधेश्वरनाथ जाने वाले इस प्रमुख मार्ग को पूरी तरह शिवमय रंग में ढाला गया है। दीवारों और पिलरों पर भगवान भोलेनाथ की भव्य कलाकृतियां व पेंटिंग्स बनाई गई हैं। रात के समय यह क्षेत्र और भी अलौकिक दिखे, इसके लिए त्रिशूल और आसपास के पूरे इलाके में विशेष रंग-बिरंगी लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है।
मेरठ रोड तिराहे को दिया शिवमय स्वरूप
महापौर सुनीता दयाल ने बताया कि निगम शहर के सभी वार्डों में आंतरिक गलियों, सड़कों और नालियों के निर्माण के साथ-साथ चौमुखी विकास और सौंदर्यकरण पर लगातार काम कर रहा है। मेरठ रोड तिराहा दिल्ली-मेरठ मार्ग का एक अहम हिस्सा है। यहां पहले उड़ने वाली धूल और गंदगी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे बाहर से आने वालों को गाजियाबाद की स्वच्छ और सुंदर छवि देखने को मिले। उन्होंने शहर की सुंदरता को बनाए रखने के लिए नागरिकों से भी सहयोग की अपील की।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने प्रोजेक्ट का ब्योरा देते हुए बताया कि फ्लाईओवर के नीचे दो अलग-अलग हिस्सों को जंक्शन के रूप में विकसित किया गया है:
° जंक्शन नंबर-1 (विजयनगर मार्ग): लगभग 831 वर्ग मीटर में फैले इस जंक्शन पर राहगीरों के बैठने के लिए बेंच, चारों ओर मजबूत ग्रिल, इंटरलॉकिंग टाइल्स और आधुनिक स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई हैं।
° जंक्शन नंबर-2 (आनंद विहार व अप्सरा बॉर्डर मार्ग): लगभग 1600 वर्ग मीटर के इस बड़े परिसर में ही 25 फीट का भव्य त्रिशूल स्थापित किया गया है। यहां चारों तरफ ग्रिलिंग, इंटरलॉकिंग और आकर्षक पेंटिंग्स का काम पूरा हो चुका है।
धूल-मुक्त क्षेत्र से राहगीरों को राहत
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/town-vending-committee-meeting-in-presence/
मुख्य अभियंता (निर्माण) नरेंद्र कुमार चौधरी के अनुसार, यह स्थान लंबे समय से उपेक्षित और धूल-धूसरित रहता था। सावन के दौरान यहां से लाखों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु गुजरते हैं, जिसे ध्यान में रखकर इस पूरे तिराहे को आध्यात्मिक पहचान दी गई है। इंटरलॉकिंग के जरिए पूरे क्षेत्र को पूरी तरह धूल-मुक्त बना दिया गया है, जिससे राहगीरों को जाम और प्रदूषण से राहत मिलने के साथ ही सुकून से बैठने की जगह भी मिल गई है।
