ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। इकोटेक एक्सटेंशन-एक स्थित इल्जिन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में हुए भीषण अग्निकांड के बाद संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर कारखाना निरीक्षण विभाग ने कंपनी में उत्पादन एवं मशीनों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार संयुक्त जांच में घटनास्थल का गहन निरीक्षण, कारखाना प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ, उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों का परीक्षण तथा भवन और मशीनों की तकनीकी स्थिति का मूल्यांकन किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि 4 अगस्त की सुबह लगभग 3:10 बजे प्रथम तल स्थित एजिंग परीक्षण क्षेत्र में आग लगी थी, जिसके बाद कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई।
अग्निकांड के बाद कंपनी में उत्पादन और मशीन संचालन पर रोक
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आग की भीषणता के कारण छत की संरचना, इस्पात ट्रस, इस्पात बीम तथा अन्य संरचनात्मक हिस्से गंभीर रूप से प्रभावित हुए। तापीय प्रसार और तीव्र तापीय संकुचन के कारण भवन की भार वहन क्षमता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।
धुआं निकासी व्यवस्था, विद्युत प्रणाली, नियंत्रण तंत्र तथा अन्य उपकरणों में भी गंभीर क्षति की संभावना पाई गई। हादसे में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के दो अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य अग्निशमन कर्मी और कारखाने का एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल होकर उपचाराधीन हैं।
सुरक्षा परीक्षण के बाद ही शुरू हो सकेगा उत्पादन
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कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत कारखाने में स्थापित सभी मशीनों, विद्युत प्रणाली तथा उत्पादन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। विभाग ने प्रबंधन को भवन की संरचनात्मक जांच, मशीन जोखिम मूल्यांकन, अग्नि सुरक्षा परीक्षण, विद्युत सुरक्षा परीक्षण, नींव विश्लेषण, भार परीक्षण, भूकंपीय विश्लेषण तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा परीक्षण मान्यता प्राप्त संस्थाओं से कराकर सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही उत्पादन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
यह संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति सहायक निदेशक कारखाना एवं कारखाना निरीक्षक अंकुल तिवारी तथा सहायक निदेशक कारखाना एवं कारखाना निरीक्षक राम बहादुर द्वारा जारी की गई है। दोनों अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आदेश का उल्लंघन होने पर कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
