नई दिल्ली (शिखर समाचार) भारतीय रंगमंच की परंपरा में अपने दमदार अभिनय और जीवंत प्रस्तुति शैली से विशिष्ट पहचान गढ़ चुके अभिनेता मनोज जोशी एक बार फिर राजधानी में ऐतिहासिक महानाट्य “चाणक्य” की रंग-ज्योति प्रज्वलित करने आ रहे हैं। यह वह नाटक है जिसने मंच पर दर्शकों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्रचिंतन, नीति, नेतृत्व और भारतीय अस्मिता पर गंभीर मंथन का अवसर दिया है। अब तक देश और विदेश में 1739 से अधिक बार सफल मंचन का इतिहास रच चुका यह नाटक 1 और 2 नवंबर 2025 को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के अभिमंच सभागार में चार विशेष प्रस्तुतियों के साथ दिल्ली में नया अध्याय लिखने जा रहा है।
मनोज जोशी ने ‘चाणक्य’ के मंचन के पीछे की सोच और प्रासंगिकता साझा की
प्रचार गतिविधियों के क्रम में राजधानी प्रवास पर आए मनोज जोशी ने मीडिया से बातचीत में “चाणक्य” की वैचारिक नींव, उसके नाट्य-शिल्प की आत्मा और आज के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में उसकी प्रासंगिकता पर बेबाकी से विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहें तो यह मंचन किसी विशाल प्रीमियम ऑडिटोरियम में किया जा सकता था, पर एनएसडी उनका रंगमंचीय संस्कार-स्थल है और इसी कारण वे इसे बड़े से बड़े मंच से अधिक सम्मानजनक मानते हैं।
चाणक्य का संबंध प्राचीन मगध (वर्तमान बिहार) से होने के कारण जब यह सवाल उठा कि क्या यह प्रस्तुति आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में रखी गई है, तो मनोज जोशी ने गंभीरता से कहा कि बिहार सदियों से विद्वानों, करुणा, विचार और राष्ट्र-निर्माण की मिट्टी रही है। सत्ता का अधिकार किसी व्यक्ति के वैभव का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र के उत्थान के लिए संपूर्ण समर्पण का मार्ग है इसी सत्य को चाणक्य ने अपने जीवन से प्रमाणित किया।
मनोज जोशी का दिल्लीवासियों के लिए विशेष निमंत्रण — 1 और 2 नवंबर को ‘चाणक्य’ का मंचन, टिकट उपलब्ध
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक लगभग तीन बार इस महानाट्य का मंचन देख चुके हैं। आगामी प्रस्तुतियों में भी कई चर्चित हस्तियों और निर्णायक विचारधारा वाले व्यक्तित्वों के आने की संभावनाएँ प्रबल हैं, हालांकि नाम उजागर करने से उन्होंने परहेज़ रखा।
नाटक पर फिल्म निर्माण की संभावना पर प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने सहज भाव से कहा कि फिल्म बनाना खर्चीला और व्यापक साधनों वाला कार्य है, लेकिन यदि भविष्य में ‘चाणक्य’ बड़े पर्दे पर रूपांतरित होता है तो उसका हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व का क्षण होगा।
‘चाणक्य’ मंचन में प्रधानमंत्री सहित चर्चित हस्तियों की उपस्थिति की संभावना, मनोज जोशी ने साझा किया
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अंत में मनोज जोशी ने दिल्लीवासियों को आत्मीय निमंत्रण देते हुए कहा कि दिल्ली की मीठी सर्द हवाओं में नीति, बुद्धि और निर्णायकता के ताप का अनुभव करने का यह अद्वितीय अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। 1 और 2 नवंबर 2025 को दोपहर 3 बजे और शाम 7 बजे, अभिमंच सभागार में “चाणक्य” मंचित होगा। टिकट बुक माई शो पर उपलब्ध हैं।
यह प्रस्तुति केवल नाटक नहीं, बल्कि इतिहास, कूटनीति, राष्ट्रधर्म और वर्तमान विचारधारा के संगम का ऐसा साक्षात्कार है जो दर्शकों को भीतर तक झकझोर देगा और आत्ममंथन को प्रेरित करेगा।

