ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। देश के युवा शक्ति एवं संवैधानिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से माय भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित विकसित भारत युवा संसद 2025–26 का जिला स्तरीय आयोजन गुरु द्रोणाचार्य समूह संस्थानों, ग्रेटर नोएडा में सम्पन्न हुआ।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के साथ हुआ भव्य आयोजन
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. संजय मयूख, सदस्य, बिहार विधान परिषद रहे। उनके साथ अनुरुद्ध प्रताप सिंह, पार्टी प्रवक्ता एवं डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार, अंतरराष्ट्रीय योग गुरु विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में डॉ. संगीता मंगेश, निदेशक, डॉ. शैलेश सिंह, रजिस्ट्रार, डॉ. ममता भारद्वाज, युवा संसद एवं राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक और शिवेंद्र सिंह, उपनिदेशक, माय भारत की गरिमामयी उपस्थिति रही।
“आपातकाल के 50 वर्ष”: युवाओं ने लोकतंत्र पर साझा किए अपने विचार
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गौतमबुद्ध नगर जिले से इस प्रतियोगिता में माय भारत पोर्टल के माध्यम से 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 500 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता का विषय था, आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक, जिस पर प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
जिला स्तर पर चयनित प्रथम तीन प्रतिभागी प्रथम अनिरुद्ध त्यागी, द्वितीय वेदांत व्यास और तृतीय हर्षिता दरगन राज्य स्तरीय युवा संसद में भाग लेंगे, जिसका आयोजन विधानसभा में किया जाएगा। इसके पश्चात् राज्य स्तर से चयनित प्रथम तीन प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर की युवा संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो भारतीय संसद में आयोजित होगी।
युवा संसद और आपातकाल की सीख: सक्रिय युवाओं से ही बनेगा समावेशी भारत
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मुख्य अतिथि डॉ. संजय मयूख ने इस अवसर पर कहा कि आपातकाल से प्राप्त शिक्षा लोकतंत्र की सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि युवा संसद आलोचनात्मक सोच और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देती है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही एक प्रगतिशील और समावेशी भारत का निर्माण संभव है। विकसित भारत की शुरुआत जागरूक युवाओं से होती है।
अनुरुद्ध प्रताप सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आपातकाल के 50 वर्ष यह संदेश देते हैं कि लोकतंत्र तभी सुरक्षित रहता है जब नागरिक सजग और जागरूक हों। यह मंच युवाओं के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत की नींव केवल सशक्त लोकतंत्र पर ही आधारित हो सकती है।

डॉ. संगीता मंगेश ने कहा कि आपातकाल का दौर लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून के शासन के महत्व को रेखांकित करता है। युवा संसद जैसे मंच युवाओं को संवाद, विचार-विमर्श और जवाबदेही का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे अतीत की गलतियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
डॉ. शैलेश सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आपातकाल के 50 वर्षों का स्मरण यह संदेश देता है कि लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए सक्रिय और जागरूक नागरिकों की आवश्यकता है। गौतमबुद्ध नगर के युवा इसके सशक्त संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श, जागरूकता और सहभागिता हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं, जिनसे भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत और समृद्ध बनेगा।
