नागौर (शिखर समाचार) अरावली पर्वतमाला को संरक्षित करने के लिए चल रहा अभियान अब तेज़ी से जनआंदोलन का रूप लेने लगा है। नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने हाल ही में सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिल्डर समूहों के दबाव में अरावली पर्वतों की परिभाषा बदल दी गई है। उनका कहना है कि इस बदलाव से हरियाणा और राजस्थान की हजारों पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो जाएंगी और उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
अरावली पर विवाद: हनुमान बेनीवाल ने सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा पर उठाए सवाल
हनुमान बेनीवाल ने सुप्रीम न्यायालय द्वारा तय नई परिभाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 100 मीटर से नीचे को पहाड़ी न मानना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वयं सुप्रीम न्यायालय में हलफनामा देकर अरावली की परिभाषा बदलने का आग्रह किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निर्णय पर पुनर्विचार की तत्काल आवश्यकता है, क्योंकि इसके प्रभाव बहुत गंभीर होंगे।
उनके अनुसार नई परिभाषा लागू होने से हरियाणा और राजस्थान की लगभग 11,000 पहाड़ियां संरक्षण की सीमा से बाहर हो जाएंगी। इससे बड़े पैमाने पर खनन, निर्माण और अन्य विकास गतिविधियां शुरू हो जाएंगी, जिससे पहाड़ों का प्राकृतिक स्वरूप ही समाप्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त, इससे मरुस्थलीकरण तेज होगा और जल, जंगल और जमीन पर गहरा संकट उत्पन्न होगा।

हनुमान बेनीवाल ने चेतावनी दी कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का खामियाजा देश पहले भी भुगत चुका है। उन्होंने उत्तराखंड और केदारनाथ जैसी आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पर्यावरणीय असंतुलन ही इन त्रासदियों का मूल कारण है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पहाड़, जंगल और प्राकृतिक संसाधन खत्म कर दिए जाएंगे, तो हम किस हवा में सांस लेंगे?
उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला कमजोर होने का प्रभाव केवल राजस्थान और हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्र भी प्रदूषण और खराब वायु जैसी गंभीर समस्याओं से प्रभावित होंगे। हनुमान बेनीवाल ने यह बताया कि इस मुद्दे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के युवाओं में भारी असंतोष है और बड़े आंदोलन की तैयारी जारी है। राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी ने इस आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है और सरकार से आग्रह किया है कि अरावली की परिभाषा पर सुप्रीम न्यायालय में पुनर्विचार कराया जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो देश का युवा अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को विवश होगा।
