ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और वायु प्रदूषण से बचाव के लिए फसल अवशेष प्रबंधन की व्यवस्थाओं का जायजा लेने भारत सरकार की केंद्रीय टीम ने शुक्रवार को जनपद का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने जेवर, दादरी और बिसरख विकासखंडों के अंतर्गत घरबरा, पारसोल, दादरी, नूरपुर, फूलपुर सहित 20 से अधिक गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटरों और किसानों के खेतों का भ्रमण किया। इस दौरान कृषि यंत्रों की उपलब्धता, उनके उपयोग और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की स्थिति देखी गई।
निरीक्षण टीम में भारत सरकार के भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (सीएफएमटीटीआई) के निदेशक डॉ. नांदेडे, उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर विवेक दुबे और वरिष्ठ सहायक साजिद गहलौत शामिल रहे। विवेक दुबे ने टीम को बताया कि जनपद में चार कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्र संचालित हैं। इनके माध्यम से किसानों को रोटावेटर, मल्चर, एमबी प्लाऊ, जीरो सीड ड्रिल, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, श्रेडर, श्रममास्टर, रीपर कंबाइनर, क्रॉप रीपर, लेजर लैंड लेवलर और डिस्क हैरो सहित आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनकी मदद से फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन और खेत से बाहर उपयोगी निस्तारण किया जा रहा है।
पराली जलाने के नुकसान बताए, पशुचारे और जैव गैस में उपयोग की जानकारी दी
टीम ने किसानों को पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण को होने वाले नुकसान की जानकारी दी। बताया गया कि धान की पराली का उपयोग पशुचारे के रूप में किया जा सकता है। बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर उन्हें नजदीकी संपीड़ित जैव गैस संयंत्रों और ब्रिकेट निर्माण इकाइयों तक भी पहुंचाया जा रहा है। जनपदीय अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष भी जिले में पराली जलाने की घटनाएं सामने नहीं आई थीं।
एफएआरएमएस ऐप से किराये पर मिल सकेंगे आधुनिक कृषि यंत्र
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सीएफएमटीटीआई निदेशक डॉ. नांदेडे ने किसानों और कस्टम हायरिंग सेंटर संचालकों से संवाद करते हुए कृषि यंत्रों के संचालन का नियमित रिकॉर्ड रखने के लिए लॉगबुक और मूवमेंट रजिस्टर संचालित करने को कहा। उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित एफएआरएमएस ऐप की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से किसान आसपास उपलब्ध कृषि मशीनरी का पता लगाकर उसे किराये पर बुक कर सकते हैं। इससे विशेषकर लघु एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने सेंटर संचालकों से उचित किराये पर मशीनें उपलब्ध कराने और किसानों से पराली नहीं जलाकर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन करने की अपील की।
