कैबिनेट वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने निट्रा में मिल्क्वीड फसल का किया निरीक्षण, देश को मिला पहला मैनिकिन ज्वाला-परीक्षण उपकरण

Rashtriya Shikhar
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Cabinet Textiles Minister Giriraj Singh inspected the milkweed crop at NITRA; the country received its first mannequin flame-testing device IMAGE CREDIT TO NITRA

गाजियाबाद (शिखर समाचार)
गाज़ियाबाद में निट्रा परिसर आज उस समय विशेष उत्साह का केंद्र बन गया, जब कैबिनेट वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने यहां मिल्क्वीड (ऑक) की विकसित की जा रही फसल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और इसे वस्त्र उद्योग के लिए एक नई दिशा बताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निट्रा द्वारा ऑक फाइबर पर किया गया शोध भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। निट्रा इस तकनीक को कई बड़ी कंपनियों को हस्तांतरित कर चुका है और अनेक उद्योग इसे अपनाने के लिए बातचीत में जुटे हैं।

गाज़ियाबाद को मिली नई पहचान: निट्रा की अत्याधुनिक ‘ज्वाला-समाविष्ट’ टेस्ट मशीन अब देश की वैज्ञानिक शक्ति

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इस अवसर पर गिरिराज सिंह ने देश के प्रथम मैनिकिन ज्वाला-समाविष्ट परीक्षण उपकरण को राष्ट्र और उद्योग जगत को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल निट्रा बल्कि पूरे गाज़ियाबाद के लिए गौरव का विषय है। यह मशीन वैश्विक मानकों – ISO 13506, ASTM F1930, NFPA 2112 और IS 17881 – के अनुरूप सुरक्षात्मक कपड़ों की अग्नि-रोधी क्षमता को वैज्ञानिक ढंग से परखने में सक्षम है।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि ऑक फाइबर की खूबियों की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं और वे इस परियोजना का विशेष रूप से अवलोकन करते रहे हैं। निट्रा के महानिदेशक डॉ एम एस परमार इस संपूर्ण अनुसंधान का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने मंत्री को बताया कि मिल्क्वीड का पौधा बेहद कम पानी में, बिना खाद-कीटनाशक के भी फलता-फूलता है और एक बार लगाए जाने के बाद लगभग दस वर्ष तक उपयोगी फाइबर देता है।

देशभर से आए बीजों की वैज्ञानिक छानबीन: डॉ. परमार की टीम निट्रा फार्म में तैयार कर रही फसलों का भविष्य

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डॉ परमार के नेतृत्व में एक कोर ग्रुप गठित किया गया है जिसमें विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं। देश के अलग-अलग इलाकों से प्राप्त बीजों को निट्रा के विशाल खेतों में उगाकर वैज्ञानिक तरीके से हर पैरामीटर का परीक्षण चल रहा है। इसका उद्देश्य फसल के आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और मृदा-संबंधी पहलुओं का व्यापक आकलन करना है।

गिरिराज सिंह ने कहा कि भविष्य में यह फसल किसानों के लिए आय का बड़ा स्रोत बनेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह परियोजना अपेक्षित परिणाम देती है, तो देश के किसान बिना अधिक लागत के इसकी खेती कर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम रख सकेंगे।

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मैनिकिन ज्वाला-समाविष्ट परीक्षण मशीन की कार्यप्रणाली बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह उपकरण सिर्फ वस्त्र उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टील, तेल, गैस, पेट्रोलियम, रेलवे और केमिकल जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मियों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। 100 से अधिक थर्मल सेंसरों से लैस यह मैनिकिन नकली दहन वातावरण में रखकर यह बताता है कि किसी फ्लैश-फायर की स्थिति में मानव शरीर पर ताप और ज्वाला का कितना प्रभाव पड़ेगा। इससे सुरक्षा परिधानों की गुणवत्ता का बहुत सटीक मूल्यांकन संभव होता है।

डॉ परमार ने कहा कि यह तकनीक सुरक्षा-वस्त्र निर्माण क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम है और इससे यह तय करना आसान होगा कि किस उद्योग के कर्मचारियों के लिए किस श्रेणी के सुरक्षात्मक कपड़े अनिवार्य होने चाहिए। इससे समय, धन और संसाधनों की बचत तो होगी ही, कर्मियों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। अंत में निट्रा ने उद्योग जगत से अपील की कि ऑक/मिल्क्वीड फाइबर आधारित उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करें और नई स्थापित मैनिकिन ज्वाला-परीक्षण सुविधा का उपयोग कर देश को प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में भागीदारी निभाएँ।

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