गाजियाबाद (शिखर समाचार)। स्वाट टीम क्राइम ब्रांच, थाना नंदग्राम पुलिस और सोनभद्र पुलिस ने संयुक्त कार्यवाही करते हुए प्रतिबंधित एसकूफ कफ सिरप और पहनसेडयल कफ सिरप की कालाबाजारी व तस्करी करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने गिरोह के 8 अभियुक्त सौरभ, शादाब, शिवाकांत, संतोष, अंबुज, धर्मेंद्र, दीपू व सुशील को गिरफ्तार किया। पुलिस ने पकड़े गए अभियुक्तों की निशानदेही पर दो 12 टायरा ट्रक, 2 आयशर कैंटर, कफ सिरप की कुल 1 लाख 57 हजार 350 शीशीयाँ, एक क्रेटा कार, 20 लाख रुपए नगद, 2 लैपटाँप, 10 मोबाईल, फर्जी मोबाईल सिम, मुहर व तापेन्ताडोल एक्सटेंडेड रिलीज़ टेबलेट्स की 19 स्टिप सहित अन्य दस्तावेज बरामद किए। बरामद दवाईयों की अनुमानित कीमत 3 करोड़ 40 लाख रुपए है। गैंग का भंडाफोड़ करने पर टीम का उत्साह वर्धन करने के लिए पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ ने 50 हजार का पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की। कार्यवाही के दौरान सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम उपासना पाण्डेय और औषधि निरीक्षक रितेश त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
सोनभद्र पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई – दिल्ली और गाजियाबाद में प्रतिबंधित कफ सिरप तस्करी का पर्दाफाश, 8 गिरफ्तार और 1150 पेटियां बरामद
संवाददाता सम्मेलन में केशव कुमार चौधरी अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय ने बताया कि सोनभद्र पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित कफ सिरप की सप्लाई दिल्ली और गाजियाबाद में होनी है। सोनभद्र पुलिस की सूचना पर स्वाट टीम क्राइम ब्रांच, थाना नंदग्राम पुलिस और सोनभद्र पुलिस ने बीती रात्रि को मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम से 8 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से 4 ट्रैकों से 1150 पेटी कफ सिरप बरामद किया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पेटी में 100 मिलीग्राम की शीशी थी। पुलिस से बचने के लिए सभी पेटी को चूने के बोरे में छुपा के रखा हुआ था। इसके अलावा ट्रैकों की बुकिंग इंदौर से गुवाहाटी तक चूने की सप्लाई के लिए की गई थी। गैंग का मुखिया सौरभ त्यागी है और संतोष भड़ाना मुख्य ट्रांसपोर्टर। पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि इन कफ सिरप में कोडीन होने के कारण इनका इस्तेमाल नशे के लिए भारत व बांग्लादेश में किया जाता है। कफ सिरप प्रतिबंध होने के कारण इसकी कालाबाजारी और तस्करी की जाती है। आसिफ, वसीम व शुभम इसकी सप्लाई बांग्लादेश करते है। विभिन्न कंपनियों के फर्जी लाइसेंस पर इनका खरीदारी नई दिल्ली से की जाती है। उसके बाद मछली गोदाम पर माल को एकत्रित करके देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है।
