बागपत (शिखर समाचार) मेरठ परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक कलानिधि नैथानी ने गुरुवार को रिजर्व पुलिस लाइन बागपत का दौरा कर प्रशिक्षण ले रहे रिक्रूट आरक्षियों से संवाद किया। उन्होंने यहां हाल ही में तैयार किए गए अतिरिक्त क्लासरूम, कम्प्यूटर लैब और पुस्तकालय का निरीक्षण किया और सुविधाओं का जायजा लेते हुए आरटीसी प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीआईजी ने प्रशिक्षुओं के साथ बैठकर भोजन भी किया और उनकी दिनचर्या, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर उन्हें बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया।
राजपत्रित अधिकारियों व शाखा प्रभारियों की बैठक, मिले कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान उन्होंने भोजनालय की स्वच्छता, खानपान की गुणवत्ता और साफ-सफाई की स्थिति देखी। प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस केवल वर्दी नहीं बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है, जिसे अनुशासन, सहयोग और सेवा भाव के साथ निभाना जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को थाना प्रबंधन, चौकी व्यवस्था, बीट सिस्टम, एफआईआर-एनसीआर की प्रक्रिया और निरोधात्मक धाराओं की जानकारी दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि रिक्रूट आरक्षियों को प्रशिक्षण अवधि में थानों का भ्रमण कराया जाएगा ताकि वे वास्तविक पुलिस कार्यप्रणाली को समझ सकें।
डीआईजी नैथानी ने तीन प्रशिक्षु आरक्षियों अभिषेक मिश्रा, गौरव यादव और शिवम राठौर को प्रशिक्षण व पुलिस कार्य संबंधी बेहतर जानकारी देने पर पुरस्कृत भी किया। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग एक परिवार की तरह है, जहां हर सदस्य को एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा रहना चाहिए। इसके उपरांत उन्होंने एसपी बागपत सूरज कुमार राय के साथ पुलिस लाइन परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
डीआईजी ने आरटीसी निरीक्षण के बाद सभी शाखा प्रभारियों के साथ की बैठक
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आरटीसी निरीक्षण के बाद डीआईजी ने पुलिस लाइन सभागार में जनपद के सभी राजपत्रित अधिकारियों, अपराध शाखा, स्वाट, सर्विलांस, साइबर सेल, फील्ड यूनिट व अन्य शाखाओं के प्रभारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने अपराध नियंत्रण और विवेचना की गुणवत्ता सुधार पर जोर देते हुए कई अहम निर्देश दिए।
उन्होंने स्वाट टीम को डीसीआरबी से गैंग सूची लेकर प्रभावी कार्रवाई करने, एएचटीयू को एनजीओ के साथ समन्वय कर गुमशुदा बच्चों की खोज पर फोकस करने और मिशन वात्सल्य पोर्टल का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। साइबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कहा कि 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज हर शिकायत का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।
डीआईजी ने धोखाधड़ी मामलों में रिकवरी और अपराधों की त्वरित विवेचना पर जोर दिया
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डीआईजी ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी जैसे मामलों में पीड़ितों की रकम की रिकवरी को प्राथमिकता दी जाए, सात वर्ष से अधिक सजा वाले प्रकरणों में फील्ड यूनिट टीम घटनास्थल पर अनिवार्य रूप से पहुंचे और छोटे अपराधों की विवेचना जल्द से जल्द पूरी की जाए। इसके अलावा उन्होंने एसपी को प्रत्येक माह अर्दली रूम करने तथा एडिशनल एसपी को महीने में दो बार अर्दली रूम करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि विवेचनाओं की नियमित समीक्षा होनी चाहिए और घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें बनाई जाएं। नगर सर्किल की समीक्षा में स्थिति असंतोषजनक पाई गई, जिस पर सुधार के लिए विशेष प्रयास करने की आवश्यकता बताई गई।
इस तरह डीआईजी नैथानी का दौरा न केवल प्रशिक्षणाधीन आरक्षियों के लिए उत्साहवर्धक साबित हुआ, बल्कि जनपद पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराध नियंत्रण की दिशा में भी नए संकल्पों को मजबूत करने वाला रहा।

