भोपाल (शिखर समाचार)। भारत के इतिहास का वह कालखंड, जिसे हम विभाजन के रूप में जानते हैं, आज भी पीड़ितों की यादों में गूंजता है। 14 अगस्त को केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की संगोष्ठी में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक गहन त्रासदी थी जिसने समाज और पीड़ित परिवारों पर स्थायी प्रभाव डाला।
इतिहास की पीड़ा को समझने का आह्वान: प्रो. संजय द्विवेदी ने विभाजन की त्रासदी से सीख लेने पर जोर दिया
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कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रो. संजय द्विवेदी के उद्गारों से हुई। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि 1947 में हुए बंटवारे के परिणाम केवल तत्कालीन राजनीति या सीमाओं तक सीमित नहीं थे। यह सदियों की भूलों और असावधानियों का परिणाम था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत विभाजन की पीड़ा को समझना और महसूस करना आज भी हमारी जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न दोहराई जाएं।
संगोष्ठी में उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान समाज में विद्यमान मतभेदों का अंग्रेजों ने कितना कुशलता से इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि यदि हम समय पर सचेत होते, तो बंटवारा टाला जा सकता था। प्रो. द्विवेदी ने यह भी कहा कि देश की एकता और अखंडता को केवल राष्ट्रीय चेतना और युवाओं की जिम्मेदारी ही सुरक्षित रख सकती है।
स्मृति दिवस के माध्यम से पीड़ितों की वेदना साझा करने का मंच
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पूर्व जनसंपर्क विभाग के संचालक लाजपत आहूजा ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्मृति दिवस की घोषणा करके पीड़ितों को अपनी वेदना साझा करने का अवसर दिया है। उन्होंने बंटवारे के दौरान महिलाओं और युवतियों के साथ हुए अत्याचारों और हिंसक घटनाओं का जिक्र किया, साथ ही यह भी बताया कि कई पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया। श्री आहूजा ने कहा कि विभाजन के बाद अपने ही देश के लोगों को शरणार्थी घोषित करना देश के इतिहास की सबसे कड़वी यादों में से एक है।
पत्र सूचना कार्यालय एवं केंद्रीय सूचना ब्यूरो के अपर महानिदेशक प्रशांत पाठराबे ने स्वतंत्रता संग्राम और स्मृति दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास से सीख सकें और भविष्य के लिए सबक ले सकें।

संगोष्ठी में शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल, पत्र सूचना कार्यालय के निदेशक मनीष गौतम और केंद्रीय सूचना संचार ब्यूरो के उपनिदेशक शारिक नूर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक पराग मांदले ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक सुश्री करिश्मा पंत, अजय उपाध्याय, समीर वर्मा और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
