——-असली आरोपी अब भी जांच के घेरे में? 18 अक्टूबर के वॉइस नोट और धर्मेश वधैर की भूमिका पर उठे सवाल
गाजियाबाद (शिखर समाचार)। राष्ट्रीय शिखर के समाचार संपादक आरव शर्मा को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से जान से मारने की धमकी देने के मामले में गिरफ्तार अंशु प्रजापति के बयान से जांच की गुत्थी और उलझ गई है। 13 अक्टूबर को आरव शर्मा के मोबाइल पर ‘हेलो’ का मैसेज भेजने से आरोपी के इनकार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह मैसेज किसने भेजा था? क्या 18 अक्टूबर को भेजे गए धमकी भरे वॉइस नोट और 13 अक्टूबर के शुरुआती मैसेज के पीछे एक ही व्यक्ति था, या इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी है?
पुलिस ने धमकी भरा वॉइस नोट भेजने के आरोप में अंशु प्रजापति को गिरफ्तार किया है। हालांकि, शुरुआती मैसेज को लेकर आरोपी के इनकार ने जांच के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरव शर्मा के परिजनों के अनुसार, आरोपी ने जांच अधिकारी के सामने और परिवार की मौजूदगी में कहा कि उसने 13 अक्टूबर को हेलो का मैसेज नहीं भेजा था। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि शुरुआती संपर्क में किस व्यक्ति ने इस मोबाइल फोन से भेजा, उसका इस्तेमाल कौन कर रहा था और उस मैसेज का बाद में भेजे गए धमकी भरे वॉइस नोट से क्या संबंध है।
18 अक्टूबर के वॉइस नोट की आवाज किसकी?
इस मामले में एक और अहम सवाल वॉइस नोट की आवाज को लेकर है। क्या 18 अक्टूबर को भेजे गए संदेश में सुनाई देने वाली आवाज गिरफ्तार आरोपी अंशु प्रजापति की ही है? क्या इसकी पुष्टि आवाज के नमूनों की वैज्ञानिक जांच से हुई है? या किसी अन्य व्यक्ति ने किसी नाम का इस्तेमाल कर धमकी भेजी थी? इन सवालों का जवाब फॉरेंसिक जांच, मोबाइल फोन के डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी प्रमाणों से ही मिल सकता है।
यदि आरोपी 13 अक्टूबर के मैसेज से इनकार कर रहा है, तो पुलिस के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि उस दिन और 18 अक्टूबर को इस्तेमाल किए गए नंबरों, उपकरणों तथा डिजिटल गतिविधियों के बीच कोई संबंध है या नहीं। धमकी भरे वॉइस नोट के संबंध में आरोपी की ओर से किए गए कथित स्वीकार की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से करना भी जरूरी है।
बार-बार सामने आ रहा धर्मेश वधैर का नाम
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पूरे प्रकरण में धर्मेश वधैर का नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। आखिर धर्मेश वधैर कौन है? उसका आरव शर्मा को भेजे गए संदेशों से क्या संबंध है? क्या वह 13 अक्टूबर को भेजे गए हेलो मैसेज की कड़ी से जुड़ा है या उसका नाम किसी दूसरे संदर्भ में सामने आया है? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पुलिस की जांच में इन सवालों का स्पष्ट होना आवश्यक है।
असली आरोपी की गिरफ्तारी तक आरव शर्मा की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
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अंशु प्रजापति की गिरफ्तारी जांच का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन यदि 13 अक्टूबर के मैसेज और 18 अक्टूबर के वॉइस नोट के बीच संबंध स्पष्ट नहीं होता, तो मामले की अन्य संभावित कड़ियों की जांच भी जरूरी है। जब तक धमकी देने वाले वास्तविक व्यक्ति या इसमें शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक आरव शर्मा की जान पर खतरे की आशंका बनी हुई है। इस स्थिति में उनकी सुरक्षा को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पुलिस को शुरुआती मैसेज भेजने वाले की पहचान, वॉइस नोट की आवाज की पुष्टि और धर्मेश वधैर से संबंधित तथ्यों की गहन पड़ताल करनी चाहिए। साथ ही, आरव शर्मा को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाना भी जरूरी है। गिरफ्तारी के बावजूद अनसुलझे सवालों के बीच उनकी सुरक्षा और पूरे मामले का निष्पक्ष खुलासा प्राथमिकता होनी चाहिए। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं कि वह इन सवालों के जवाब साक्ष्यों के आधार पर कब सामने लाती है।
