———1 जून से 12 सितंबर तक 213 संपत्तियों का निस्तारण, मधुबन-बापूधाम में सबसे अधिक 121 संपत्तियां बिकीं
गाजियाबाद (शिखर समाचार)। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में लागू पहले आओ, पहले पाओ व्यवस्था को आमजन और खरीदारों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से पिछले छह माह में संपत्तियों के विक्रय से प्राधिकरण को लगभग 517 करोड़ रुपये की सकल धनराशि प्राप्त हुई है। वहीं 1 जून से 12 सितंबर 2026 तक कुल 213 संपत्तियों का विक्रय किया गया, जिनका कुल संपत्ति मूल्य लगभग 65.22 करोड़ रुपये रहा।
उक्त अवधि में मधुबन-बापूधाम योजना के पॉकेट-एफ में सर्वाधिक 121 संपत्तियों का विक्रय हुआ। इनका कुल संपत्ति मूल्य लगभग 40.89 करोड़ रुपये रहा। इंदिरापुरम योजना में 89 संपत्तियों का विक्रय हुआ, जिनका कुल मूल्य लगभग 23.31 करोड़ रुपये है। इसके अलावा कोयल एन्क्लेव योजना में तीन संपत्तियों का विक्रय हुआ, जिनका कुल मूल्य लगभग 1.03 करोड़ रुपये रहा। इस प्रकार करीब साढ़े तीन माह में 213 संपत्तियों के निस्तारण से 65.22 करोड़ रुपये के संपत्ति मूल्य का निस्तारण हुआ।
पारदर्शी व्यवस्था से खरीदारों को मिल रहा अवसर
मधुबन-बापूधाम योजना में हुई बिक्री विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यहां बिकी 121 संपत्तियां कुल विक्रित संपत्तियों की आधे से अधिक हैं। इससे प्राधिकरण की नियोजित योजनाओं में उपलब्ध संपत्तियों के प्रति खरीदारों की रुचि और विश्वास का पता चलता है। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ व्यवस्था का उद्देश्य उपलब्ध संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र आवेदकों को प्राधिकरण की नियोजित एवं वैध संपत्तियां प्राप्त करने का सहज अवसर मिल सके।
विकास कार्यों के लिए मजबूत होगा वित्तीय आधार
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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने कहा कि पहले आओ, पहले पाओ व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध संपत्तियों का पारदर्शी, सरल और समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के प्रति आमजन की बढ़ती रुचि से संपत्तियों के प्रभावी उपयोग के साथ प्राधिकरण के वित्तीय संसाधनों में भी वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि प्राप्त धनराशि का उपयोग गाजियाबाद के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और जनहित से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। प्राधिकरण का प्रयास है कि पात्र आवेदकों को बेहतर और वैध संपत्तियों के विकल्प उपलब्ध कराने के साथ निस्तारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनविश्वास बनाए रखा जाए।
