शामली (शिखर समाचार)।
विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र कक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पोषण पाठशाला एवं आयुष्मान भारत विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता जिलाधिकारी आलोक यादव ने की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी देते हुए जन्म के बाद छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध पिलाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
छह माह तक केवल मां का दूध शिशु के लिए जरूरी: विशेषज्ञ
कार्यशाला में बताया गया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार अभी भी केवल 43 प्रतिशत नवजात शिशुओं को समय पर माँ का दूध मिल पाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला पहला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए अमृत के समान होता है, जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस अवधि में शहद, जन्मघुट्टी अथवा अलग से पानी देने की आवश्यकता नहीं होती। छह माह बाद पूरक आहार शुरू करते हुए कम से कम दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है तथा कुपोषण की रोकथाम में भी सहायता मिलती है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जागरूकता बढ़ाने के निर्देश
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/town-vending-committee-meeting-in-presence/
जिलाधिकारी आलोक यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिए कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां अपने-अपने क्षेत्रों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान के महत्व और इसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करें, ताकि प्रत्येक नवजात को जीवन की बेहतर शुरुआत मिल सके।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी ब्रजेंद्र शुक्ला, जिला कार्यक्रम अधिकारी यामिनी रंजन, बाल विकास परियोजना अधिकारी अर्चना सिंह, बाबर खान, ममता खोखर, मुख्य सेविकाएं तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां उपस्थित रहीं।
