बिजनौर (शिखर समाचार)।
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रावली तटबंध पर कराए गए बाढ़ सुरक्षा कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे होने के बाद सिंचाई विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभागीय अधिकारी तटबंध की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। तटबंध की स्थिति से संबंधित नियमित प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेजे जा रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
रावली तटबंध पर चौबीसों घंटे निगरानी
बिजनौर जनपद में गंगा नदी 100 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में प्रवाहित होती है। पूरे क्षेत्र में रावली तटबंध ही बाढ़ से सुरक्षा का प्रमुख साधन है, जिसकी देखरेख मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-5 के जिम्मे है। गत वर्ष तटबंध का लगभग एक किलोमीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन विभाग की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ के कारण बाढ़ का पानी आबादी और कृषि भूमि तक नहीं पहुंच सका।
एसीबीएम तकनीक से मजबूत किया गया तटबंध
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इसके बाद अधिशासी अभियंता करण पाल सिंह के नेतृत्व में क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया गया। विभाग ने एसीबीएम तकनीक के माध्यम से तटबंध को निर्धारित मानकों के अनुरूप पुनर्निर्मित किया। साथ ही सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए तीन नए जलरोधक अवरोध (स्पर) तथा एक नया तट संरक्षण ढांचा (स्टड) तैयार किया गया, जबकि आधा दर्जन पुराने तट संरक्षण ढांचों की मरम्मत कर उन्हें भी सुदृढ़ बनाया गया।
किसानों और ग्रामीणों में बढ़ा भरोसा
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सिंचाई विभाग ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था कर रखी है। अवर अभियंता ओमकार सिंह तथा मोहम्मद आरिफ ने बताया कि रावली से शीश महल तक पूरे तटबंध की लगातार निगरानी की जा रही है। तटबंध के सुदृढ़ीकरण से क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है। उनका कहना है कि फिलहाल तटबंध की मजबूती के कारण बाढ़ से फसलों और आबादी को किसी प्रकार का खतरा नहीं दिखाई दे रहा है।
