गाजियाबाद (शिखर समाचार)। शहर के विकास और सौंदर्यीकरण को नई दिशा देने के साथ-साथ उसकी ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में गाजियाबाद नगर निगम ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देशन में नगर निगम शहर के प्रमुख ऐतिहासिक गेटों के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार की योजना पर तेजी से कार्य कर रहा है।
इस संबंध में नगर निगम की निर्माण विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न ऐतिहासिक द्वारों का सर्वे पूरा कर लिया है और जल्द ही इनके संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा। नगर निगम द्वारा जिन प्रमुख ऐतिहासिक गेटों का सर्वे कराया गया है, उनमें जवाहर गेट, दिल्ली गेट, सुभाष द्वार (डासना गेट), सराय गेट और सिहानी गेट शामिल हैं।
ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से होंगे विकसित
इन गेटों का इतिहास अंग्रेजों और मुगलकाल से जुड़ा हुआ माना जाता है तथा ये गाजियाबाद की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। नगर निगम अब इन धरोहरों को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक स्वरूप के साथ विकसित करने की योजना बना रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी शहर के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम केवल आधारभूत सुविधाओं और स्वच्छता पर ही ध्यान नहीं दे रहा है, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए भी गंभीर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार माना जाता है और यहां आने वाले लोगों पर शहर की पहली छाप उसके प्रमुख स्थलों और विरासतों से पड़ती है।
छह प्रमुख स्थानों पर चल रहा सौंदर्यीकरण का कार्य
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नगर आयुक्त ने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में सौंदर्यीकरण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। शहर के छह प्रमुख स्थानों पर स्कल्पचर और अन्य कलात्मक संरचनाओं के माध्यम से सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है।
इनमें आनंद विहार पॉइंट, इंदिरापुरम, मोहन नगर हिंडन चौक, रोटरी गोल चक्कर, तिगड़ी गोल चक्कर तथा राजनगर सेक्टर-10 जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर आकर्षक संरचनाएं स्थापित कर शहर की सुंदरता को बढ़ाया जा रहा है।
गेटों की मरम्मत के साथ लगाए जाएंगे सूचना पट्ट
ऐतिहासिक गेटों के सौंदर्यीकरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। योजना के अंतर्गत गेटों की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उनकी मरम्मत, रंग-रोगन, प्रकाश व्यवस्था, आसपास के क्षेत्र का विकास और आकर्षक लैंडस्केपिंग जैसे कार्य किए जाएंगे।
इसके अलावा गेटों के इतिहास और महत्व की जानकारी देने वाले सूचना पट्ट भी लगाए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को इनके बारे में जानकारी मिल सके।
नगर निगम का उद्देश्य केवल पुराने ढांचों की मरम्मत करना नहीं है, बल्कि उन्हें शहर की पहचान के रूप में विकसित करना है। इसके लिए नगर निगम पुराने निवासियों और इतिहास से जुड़े जानकार लोगों से भी बातचीत कर रहा है। उनके सुझावों के आधार पर शहर की पुरानी धरोहरों को चिह्नित किया जा रहा है।
नगर निगम पुराने तालाबों, ऐतिहासिक इमारतों और प्राचीन गेटों को संरक्षित करने के लिए विस्तृत सूची तैयार कर रहा है, ताकि भविष्य में इनके संरक्षण और विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा सके।
