ऑपरेशन प्रहार : अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए स्वाट टीम ने 3 अभियुक्तों को किया गिरफ्तार

Rashtriya Shikhar
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Operation Prahar: SWAT Team Busts Interstate Illegal Arms Smuggling Gang, Arrests 3 Accused IMAGE CREDIT TO पुलिस

गाजियाबाद (शिखर समाचार)। ऑपरेशन प्रहार के तहत अपराध शाखा और थाना लोनी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने अवैध हथियार और कारतूस की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके तीन शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सात अवैध पिस्टल, 22 जिंदा कारतूस तथा एक महिंद्रा थार कार बरामद की गई है।

आरोपियों की पहचान अरुण कुमार, रंजीत राय और अभिषेक शर्मा उर्फ मोटू के रूप में हुई है। तीनों लंबे समय से अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई के नेटवर्क से जुड़े हुए थे। आरोपियों के कब्जे से छह अवैध पिस्टल, एक 30 बोर पिस्टल, 20 कारतूस और दो कारतूस 7.62 बोर के बरामद किए गए हैं। इसके अलावा दिल्ली नंबर की एक महिंद्रा थार गाड़ी भी जब्त की गई है, जिसका इस्तेमाल अवैध हथियारों की ढुलाई में किया जा रहा था। बरामदगी के आधार पर आरोपियों के खिलाफ थाना लोनी में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

तिहाड़ जेल में बंद अपराधी के इशारे पर चल रहा था नेटवर्क

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पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए हैं। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अभिषेक शर्मा ने बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है और अंकुर विहार क्षेत्र में उसका कार्यालय है। इसी व्यवसाय के दौरान उसकी मुलाकात रंजीत राय से हुई और बाद में रंजीत के माध्यम से अरुण से संपर्क स्थापित हुआ। तीनों मिलकर अवैध हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क संचालित करने लगे।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का संबंध दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात अपराधी उमेश शर्मा उर्फ उमेश पंडित से है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उमेश पंडित के निर्देश पर वह गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अवैध हथियारों की सप्लाई करते थे। तिहाड़ जेल में बंद होने के बावजूद उमेश पंडित अपने नेटवर्क के माध्यम से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था।

30-35 हजार में खरीदकर 50-55 हजार रुपये में बेचते थे हथियार

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पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी हथियारों की खरीद अपने एक सहयोगी रितिक के माध्यम से करते थे, जो शामली क्षेत्र का निवासी बताया गया है। रितिक से हथियार प्राप्त करने के बाद आरोपी उन्हें मांग के अनुसार आगे सप्लाई करते थे। एक पिस्टल करीब 30 से 35 हजार रुपये में खरीदी जाती थी और उसे 50 से 55 हजार रुपये तक में बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था।

पुलिस के अनुसार पिछले एक वर्ष के दौरान यह गिरोह करीब 20 अवैध हथियारों की सप्लाई कर चुका है। आरोपियों ने कुछ हथियार खड़खड़ी निवासी एक व्यक्ति को भी उसकी मांग पर उपलब्ध कराए थे। पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और हथियारों की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

अपराध रोकने में अहम मानी जा रही पुलिस कार्रवाई

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गिरफ्तार आरोपी अरुण कुमार गाजियाबाद के बॉर्डर थाना क्षेत्र का निवासी है, जबकि रंजीत राय ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र और अभिषेक शर्मा दिल्ली के सोनिया विहार इलाके का निवासी है। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी संगठित तरीके से कार्य कर रहे थे और विभिन्न राज्यों से हथियार मंगवाकर एनसीआर क्षेत्र में उनकी आपूर्ति करते थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह की गिरफ्तारी से हत्या, लूट, रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले अवैध हथियारों की सप्लाई पर अंकुश लगेगा। फिलहाल पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाने के साथ ही हथियार उपलब्ध कराने वाले स्रोतों और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की भी घोषणा की गई है।

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