अरणि गौड़
नई दिल्ली (शिखर समाचार)।
वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी अब केवल पर्यावरणीय संकट नहीं रह गई है, बल्कि यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव दुनिया भर में दिखाई दे रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान और सरकारी पहल
नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान’ को देश के 250 से अधिक शहरों में लागू कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम करना और टिकाऊ कूलिंग समाधान विकसित करना है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव और स्थानीय समाधान की आवश्यकता
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मंत्री ने कहा कि बढ़ती गर्मी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डेंगू जैसे संक्रामक रोगों से लेकर हृदय रोग और मधुमेह जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों तक, सभी पर तापमान वृद्धि का प्रभाव देखा जा रहा है। उन्होंने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए जलवायु और स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि भारत की भौगोलिक विविधता के कारण यहां एक समान समाधान लागू नहीं किया जा सकता। देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग जलवायु परिस्थितियां हैं, इसलिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार कूलिंग समाधान विकसित करना जरूरी है।
ऊर्जा खपत, सामाजिक समानता और वैश्विक जिम्मेदारी
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उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक एयर कंडीशनिंग और कूलिंग उपकरणों का उपयोग ऊर्जा खपत बढ़ा रहा है, जिससे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जिम्मेदार उपयोग और संतुलित तापमान बनाए रखने की अपील की। मंत्री ने कहा कि कूलिंग सुविधाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है, क्योंकि असमानता सामाजिक अंतर को और बढ़ा सकती है। उन्होंने सरकार, शोध संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया। अंत में जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत, अपनी विशाल आबादी के कारण, वैश्विक जलवायु कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और देश के कदम दुनिया के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं।
