महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर संसद में टकराव, लोकसभा में फंसने के आसार

Rashtriya Shikhar
4 Min Read
There is a standoff in Parliament over the Women’s Reservation and Delimitation Bill, with indications that it may face hurdles in the Lok Sabha. IMAGE CREDIT TO लोकसभा फाइल फोटो

नई दिल्ली (शिखर समाचार)। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक जंग देखने को मिल रही है। गुरुवार को लोकसभा में इस मुद्दे पर पूरे दिन जोरदार बहस हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।

महिला सशक्तिकरण बनाम राजनीतिक टकराव

ALSO READ:https://www.jagran.com/uttar-pradesh/ghaziabad-indirapuram-woman-death-family-halts-last-rites-demands-probe-40199229.html

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधेयक का जोरदार समर्थन करते हुए इसे नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक कारणों से महिलाओं को उनका अधिकार मिलने से रोका जा रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पारदर्शी तरीके से परिसीमन कर लोकतंत्र को और मजबूत करना चाहती है।

परिसीमन प्रक्रिया पर केंद्र सरकार का पक्ष

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/town-vending-committee-meeting-in-presence/

गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा और इसमें किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वहीं विपक्ष ने विधेयक के स्वरूप पर गंभीर आपत्ति जताई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण का सभी दल समर्थन करते हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सरकार की राजनीतिक चाल है। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए और परिसीमन की प्रक्रिया को अलग रखा जाए।

विपक्ष का आरोप और दक्षिणी राज्यों की आपत्ति

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/humorous-poetry-recitation-by-shambhu-shekhar/

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल कर परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है, जिससे राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उनका कहना है कि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय जैसे मानकों को भी ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

दक्षिण भारत के कई राज्यों ने भी इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण और विकास में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद परिसीमन के बाद उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं, जो उनके साथ अन्याय होगा।

संसद में विधेयक की राह मुश्किल

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/town-vending-committee-meeting-in-presence/

संसदीय गणित बना चुनौती
संसद में इस विधेयक के पारित होने को लेकर संशय बना हुआ है। संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में करीब 440 सांसदों का समर्थन आवश्यक है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास लगभग 350 सांसद ही हैं। ऐसे में विपक्ष के कड़े रुख के चलते विधेयक के लोकसभा में फंसने की आशंका जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विधेयक पारित नहीं होता है, तो सरकार इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जा सकती है और विपक्ष को महिला आरक्षण का विरोधी बताने की रणनीति अपना सकती है।

अब सभी की नजरें शुक्रवार को लोकसभा में होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जबकि इसके बाद शनिवार को राज्यसभा में इसे पेश किया जाएगा। राज्यसभा में इसके पारित होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक मानी जा रही है, लेकिन असली परीक्षा लोकसभा में ही होगी।

Share This Article
Leave a comment