नई दिल्ली (शिखर समाचार)।
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की वार्षिक साधारण सभा 2026 का समापन सत्र गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। चार दिनों तक चली इस राष्ट्रीय चिंतन बैठक में देशभर से आए लगभग 350 पदाधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति और विचार
समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल का विशेष सान्निध्य रहा। इस अवसर पर अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कान्हेरे, महामंत्री देशराज शर्मा, संगठन मंत्री गोविंद महंत सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने वाला संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है, जो शिक्षा के जरिए चरित्र निर्माण, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करता है।
शिक्षा सुधार और नई दिशा पर मंथन
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बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी युग में नवाचार और विद्यार्थियों में संस्कारों के विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
भविष्य की योजनाएं और महत्वपूर्ण संकल्प
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समापन सत्र में संगठन ने कई महत्वपूर्ण संकल्प लिए। वर्ष 2030 तक देश के प्रत्येक जिले में विद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया, ताकि युवाओं को इस बुराई से दूर रखा जा सके।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 50 कौशल विकास केंद्रों की स्थापना हेतु प्रायोगिक परियोजना शुरू करने की घोषणा की गई। साथ ही वर्ष 2027 में 75 वर्ष पूर्ण होने पर ‘अमृत महोत्सव’ मनाने का भी निर्णय लिया गया।
तकनीकी क्षेत्र में भी संगठन ने नए कदम उठाने की बात कही। शैक्षिक और सांस्कृतिक सामग्री के प्रसार के लिए ‘विद्या भारती टीवी’ शुरू करने की घोषणा की गई।
अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र निर्माण के कार्य में पूर्ण समर्पण के साथ योगदान देने का संकल्प लिया।
