खालिद तालिब बंधु प्रकरण ने पकड़ा तूल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

Rashtriya Shikhar
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Khalid Talib Bandhu case gains momentum, demand for impartial investigation intensifies IMAGE CREDIT TO REPORTER

बिजनौर (शिखर समाचार)। जनपद में बहुचर्चित खालिद तालिब बंधुओं का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह अपने क्रियाकलापों को लेकर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा तालिब खालिद बंधुओं को भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं में गिरफ्तार किए जाने से पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल

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मौजूदा घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता खुलकर मैदान में उतर आए हैं और प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। जिले के विभिन्न संगठनों और दलों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपील की है कि मामले को संतुलित ढंग से संभाला जाए ताकि जनपद का माहौल खराब न हो।

विवाद की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

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गौरतलब है कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रॉबिन चौधरी के साथ मामूली विवाद के बाद प्रशासन ने तालिब खालिद बंधुओं के शस्त्र लाइसेंस और पासपोर्ट निलंबित कर दिए थे तथा उनकी आरा मशीन और फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया था।
बताया जाता है कि 1 अप्रैल को पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह अपने समर्थकों के साथ बंधुओं की आरा मशीन पर पहुंचे, जहां प्रशासनिक जांच चल रही थी। आरोप है कि वहां उन्होंने हंगामा किया और सुरक्षा कर्मियों के शस्त्र छीनने का प्रयास किया। इसके बाद तालिब खालिद बंधु अपने परिजनों के साथ थाने पहुंचे और कार्रवाई के विरोध में आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी दी।

निष्पक्ष जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

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पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने भी थाने में तहरीर दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्हें पुराने मामले में समझौते के बहाने बुलाकर दबाव बनाया गया तथा विवाद के दौरान बंधुओं द्वारा फायरिंग की गई। पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने घटना की निंदा की और इसे उत्पीड़न बताया। कांग्रेस, बसपा और सपा के नेताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कुल मिलाकर, यह प्रकरण अब प्रशासन और राजनीति के बीच बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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