हापुड़ और मेरठ में एटीएस का बड़ा खुलासा, तीन फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज पकड़े विदेशी कॉल को लोकल बनाकर चल रहा था नेटवर्क

Rashtriya Shikhar
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Major ATS bust in Hapur and Meerut IMAGE CREDIT TO पुलिस

हापुड़/मेरठ (शिखर समाचार)। उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक बड़ी और संगठित कार्रवाई करते हुए हापुड़ और मेरठ में संचालित फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस नेटवर्क के तार देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा

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जानकारी के मुताबिक एटीएस की मेरठ यूनिट को गुप्त सूचना मिली थी कि मेरठ और हापुड़ में अवैध रूप से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज संचालित किए जा रहे हैं, जिनके जरिए विदेश से आने वाली कॉल्स को तकनीकी माध्यम से लोकल कॉल में बदलकर आगे ट्रांसफर किया जाता है।
इस इनपुट के आधार पर गुरुवार को एटीएस ने मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के समर गार्डन इलाके सहित हापुड़ में कुल आठ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान तीन फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा हुआ।

उपकरण और सिम कार्ड बरामद

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छापेमारी में एटीएस को भारी मात्रा में उपकरण बरामद हुए, जिनमें करीब 300 पहले से एक्टिवेट मोबाइल सिम और चार सिम बॉक्स शामिल हैं। जांच में सामने आया कि ये सभी सिम अन्य लोगों की फर्जी या गलत आईडी पर लिए गए थे और इन्हें अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

मास्टरमाइंड और अन्य गिरफ्तार

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जांच में यह भी पता चला कि पूरे नेटवर्क का संचालन मेरठ के लिसाड़ी गेट क्षेत्र निवासी सद्दाम कर रहा था, जिसे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। एटीएस ने उसे हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।
फर्जी आईडी पर सिम उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मेरठ के फरदीन नामक व्यक्ति की थी, जिसे भी गिरफ्तार किया गया। फरदीन की लिसाड़ी गेट क्षेत्र में मोबाइल और सिम कार्ड की दुकान बताई जा रही है, जहां से यह पूरा नेटवर्क संचालित होता था।

तकनीक का गलत इस्तेमाल और आगे की जांच

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एटीएस अधिकारियों के अनुसार आरोपी विदेशी कॉल को वीओआईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल पर आवाज़) तकनीक के जरिए लोकल कॉल में कन्वर्ट करते थे, जिससे कॉल की वास्तविक लोकेशन और पहचान छिप जाती थी। इस तकनीक का इस्तेमाल अक्सर साइबर अपराध, धोखाधड़ी और देश विरोधी गतिविधियों में किया जाता है।
फिलहाल इस मामले में 15 से अधिक अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है और एटीएस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही है। इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे एक बड़े अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

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