हापुड़ (शिखर समाचार)। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल कॉलेज में एक जटिल आर्टेरियोवेनस (एवी) फिस्टुला सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। यह सफलता क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ से जूझ रहे मरीजों के लिए सुरक्षित और दीर्घकालिक उपचार का नया रास्ता खोलती है।
गंभीर स्थिति में थी मरीज, डायलिसिस बना चुनौती
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिलखुवा क्षेत्र की एक महिला पिछले कई महीनों से क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ से पीड़ित थीं और जनवरी से सप्ताह में दो बार हीमोडायलिसिस ले रही थीं। मरीज टाइप 2 डायबिटीज़ से भी ग्रसित थीं, जिसके चलते उनकी रक्त वाहिकाएं बेहद कमजोर हो चुकी थीं।
अस्पताल में भर्ती के दौरान उन्हें पूरे शरीर में सूजन, अत्यधिक थकान और नाजुक नसों जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, जिससे डायलिसिस के लिए उपयुक्त वैस्कुलर एक्सेस तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था।
अस्थायी उपचार से स्थायी समाधान की ओर कदम
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प्रारंभिक चरण में मरीज का डायलिसिस सेंट्रल वेनस कैथेटर के माध्यम से किया गया, जो केवल अस्थायी समाधान होता है और इसमें संक्रमण व थ्रोम्बोसिस जैसी जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है।
मरीज की दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकीय टीम ने स्थायी समाधान एवी फिस्टुला निर्माण का निर्णय लिया। एवी फिस्टुला को डायलिसिस के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है, जिसमें धमनी और शिरा को जोड़कर एक स्थायी रक्त प्रवाह मार्ग तैयार किया जाता है।
विशेषज्ञ टीम ने जटिल सर्जरी को बनाया सफल
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यह जटिल सर्जरी असिस्टेंट प्रोफेसर एवं प्लास्टिक सर्जन डॉ. शिप्रा गर्ग ने सफलतापूर्वक संपन्न की। उन्होंने मरीज के बाएं ऊपरी अंग में ब्रैकियल आर्टरी और सेफेलिक वेन के बीच एनास्टोमोसिस कर एवी फिस्टुला तैयार किया। कमजोर नसों के बावजूद सर्जरी को अत्यधिक सटीकता और विशेषज्ञता के साथ पूरा किया गया।
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित अग्रवाल के मार्गदर्शन में मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसमें डॉ. खाव्या ए.आर., डॉ. मल्लिका, ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन अजय और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ शामिल रहे।
सर्जरी के बाद स्थिर हालत, बेहतर जीवन की उम्मीद
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सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उन्हें जल्द ही नए एवी फिस्टुला के माध्यम से नियमित डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इससे उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
संस्थान प्रबंधन ने इस उपलब्धि को टीमवर्क, विशेषज्ञता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
