रमजान की शुरुआत के साथ मस्जिदों में उमड़ा जनसैलाब, नमाज के लिए बड़ों के साथ बच्चों में भी दिखा खास उत्साह

Rashtriya Shikhar
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With the Beginning of Ramadan, Crowds Flock to Mosques; Children Show Special Enthusiasm for Prayers Alongside Elders IMAGE CREDIT TO REPORTER

गाजियाबाद (शिखर समाचार)

पवित्र माह रमजान का चांद दिखाई देते ही पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल और रौनक बढ़ गई है। रमजान की शुरुआत के साथ ही मस्जिदों में नमाज अदा करने वालों की अच्छी खासी तादाद जुटने लगी है। पहले जुमे और शुरुआती नमाजों में अकीदतमंदों की भीड़ इस कदर रही कि कई मस्जिदों में जगह कम पड़ गई। खास बात यह रही कि इस बार केवल बड़े ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों में भी मस्जिद जाकर नमाज पढ़ने का विशेष उत्साह और आकर्षण देखने को मिला।

मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

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संजय कॉलोनी स्थित मदीना मस्जिद, चांद मस्जिद, बड़ी मस्जिद सहित आसपास की सभी मस्जिदों में नमाज के समय रोजेदारों की लंबी लंबी कतारें दिखाई दीं। कई स्थानों पर नमाजियों को मस्जिद के अंदर जगह न मिलने पर बाहर सड़क और गलियों तक सफें बिछाकर नमाज अदा करनी पड़ी। रमजान के पहले जुमे को लेकर लोगों में खास उत्साह रहा। नमाज से पहले मस्जिदों में कुरान ए पाक की तिलावत और इबादत का सिलसिला जारी रहा।

मदीना मस्जिद के इमाम हाफिज इरशाद साहब ने खुत्बे में रमजान की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माह ए रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इसी पवित्र माह में कुरान ए पाक नाजिल हुआ और अल्लाह तआला अपने बंदों पर विशेष करम फरमाते हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने में एक नेकी का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है, इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा नमाज अदा करे, कुरान की तिलावत करे और जरूरतमंदों की मदद करे।

इमाम ने बयान की रमजान की फजीलत

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इमाम ने कहा कि रोजा केवल भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने विचारों, व्यवहार और बोलचाल को भी पवित्र रखने का अभ्यास है। रोजा इंसान को बुराइयों से दूर रखता है और उसके भीतर सब्र, सहनशीलता और परहेजगारी पैदा करता है। रमजान के दौरान शैतानों को कैद कर दिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, ताकि बंदे पूरे मनोयोग से इबादत कर सकें।

मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष साजिद एडवोकेट ने बताया कि जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार माना गया है और रमजान तमाम महीनों का सरदार है। जब रमजान में जुमे की आमद होती है तो उसकी फजीलत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है पहला दस दिनों का अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नुम से निजात का होता है। इस पूरे महीने में अल्लाह की खास रहमत इमान वालों पर बरसती है।

बच्चों में भी दिखा खास उत्साह

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इस बार रमजान के मौके पर बच्चों में जो उत्साह दिखाई दिया, वह विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। छोटे-छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ मस्जिद पहुंचकर नमाज अदा करते नजर आए। डेढ़ वर्षीय अरहान युसूफ भी अपने पिता साजिद अधिवक्ता के साथ मदीना मस्जिद में नमाज के लिए पहुंचा। बच्चों में मस्जिद जाने और नमाज पढ़ने की बढ़ती रुचि को लोग अच्छे संस्कारों और धार्मिक वातावरण का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

रमजान के शुरुआती दिनों में ही मस्जिदों का खचाखच भर जाना इस बात का प्रमाण है कि अकीदतमंद इस पाक महीने का इस्तकबाल पूरे जोश, अकीदत और श्रद्धा के साथ कर रहे हैं। इबादत, तिलावत, दुआ और खैरात के जरिए लोग इस महीने को अपने जीवन में बदलाव और आत्मशुद्धि का अवसर मानते हुए अधिक से अधिक सवाब हासिल करने में जुटे हैं।

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