नई दिल्ली (शिखर समाचार)
देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शुक्रवार को आध्यात्मिक चेतना, मानवीय मूल्यों और विश्व शांति के संदेश से ओतप्रोत नौ दिवसीय रामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, अहिंसा विश्व भारती और विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश तथा प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू की गरिमामयी उपस्थिति रही। 17 से 25 जनवरी तक चलने वाली इस रामकथा का आयोजन भारत मंडपम के बहुउद्देश्यीय सभागार में किया जा रहा है।
जहाँ जैन संत की वाणी से गूंजे रामकथा, वहाँ साकार हुआ भारतीय संस्कृति का अद्भुत समन्वय
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि जैन परंपरा से जुड़े संत द्वारा रामकथा का आयोजन अपने आप में एक अनूठी और ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की व्यापकता और समन्वय की जीवंत मिसाल है, जहां विभिन्न आध्यात्मिक धाराएं एक साझा उद्देश्य विश्व शांति के लिए एकत्रित हुई हैं।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने इस अवसर को भारत की आध्यात्मिक विरासत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आचार्य लोकेश द्वारा आयोजित यह सनातन समागम देश की आत्मिक नींव को सुदृढ़ करने वाला प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि मोरारी बापू की यह 971वीं रामकथा है और इसके माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी से शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश संपूर्ण विश्व में प्रसारित होगा, जो प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है।
राम और महावीर के संदेशों से वैश्विक शांति की ओर—अशांत समय में करुणा और अहिंसा का संकल्प
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रामकथा वाचन करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान राम और भगवान महावीर के अहिंसा, करुणा, संयम और भाईचारे के संदेश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के अशांत वैश्विक वातावरण में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
विश्व शांति दूत जैन आचार्य लोकेश ने कहा कि रामकथा का मूल उद्देश्य मानवता को जोड़ना और विश्व बंधुत्व की भावना को सशक्त करना है। उन्होंने कहा कि मोरारी बापू ने समाज के उपेक्षित वर्गों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक रामकथा के माध्यम से सद्भाव, करुणा और मानवीय मूल्यों का संदेश पहुंचाया है। विश्व शांति केंद्र के लिए आयोजित यह नौ दिवसीय रामकथा निश्चित रूप से वैश्विक शांति प्रयासों को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी। रामकथा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात आरती संपन्न हुई। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने प्रसाद रूप में भोजन ग्रहण किया। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं। उद्घाटन अवसर पर देश-विदेश से आए संत, विद्वान, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

