मुरादनगर (शिखर समाचार)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में के.एन. इंटर कॉलेज ग्राउंड में जारी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास साध्वी पद्महस्ता भारती ने कथामृत की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। साध्वी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा वेदों का सत्व है, जो युगों-युगों से मानवता को धर्म, ज्ञान और सम्यक आचरण की दिशा में प्रेरित करती आई है। यह केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन के अंधकार को चीरने वाला प्रकाशपुंज है।
कथामृत का अद्भुत सामंजस्य: श्रीमद्भागवत से जीवन में चेतना और कल्याण का मार्ग
साध्वी ने श्रीमद्भागवत महापुराण की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘श्रीमद्भागवत’ का तात्पर्य है ऐसी दिव्य वाणी जिसमें श्री अर्थात् चैतन्य, सौन्दर्य और ऐश्वर्य का अद्भुत सामंजस्य समाहित है। यह वही अमृतमयी कथा है जो निश्चेष्ट जीवन में चेतना का संचार करती है और मनुष्य को उद्देश्यपूर्ण, सद्गुणमय तथा कल्याणकारी मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि कथामृत देवताओं तक के लिए दुर्लभ है, इसी कारण राजा परीक्षित ने स्वर्गामृत का त्याग कर कथामृत का वरण किया, क्योंकि स्वर्गामृत से केवल पुण्यों की वृद्धि होती है, जबकि कथामृत पापों का समूल नाश कर देता है।
साध्वी पद्महस्ता भारती ने वृन्दावन के आध्यात्मिक स्वरूप का रहस्य उद्घाटित करते हुए कहा कि वास्तविक वृन्दावन बाहर नहीं, बल्कि मन के भीतर स्थित है। मन में भक्ति तो जन्म लेती है, परन्तु स्थिर नहीं हो पाती, क्योंकि भक्ति को स्थायी बनाने हेतु वैराग्य और प्रेम का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है श्रोता जिस भाव से कथा का श्रवण करता है, कथा उसे उसी भावानुसार फल प्रदान करती है। ‘श्रीमद्भागवतेनैव भक्ति मुक्ति करे स्थिते’ अर्थात् कथा से भक्ति भी प्राप्त होती है और मुक्ति भी, यह साधक की भावना पर निर्भर करता है।

परीक्षित प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य मोह, माया और आसक्ति की बेड़ियों को काटकर परमात्मा से मिलन करना है। यही मिलन जीवन को कल्याणकारी और सफल बनाता है। साध्वी ने कहा कि कथा सुनने मात्र से फल नहीं मिलता, जब तक उसकी शिक्षा को आचरण में न उतारा जाए।
कार्यक्रम में स्वामी नरेशानंद ने संस्थान की सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान समाज में चेतना, जागृति और सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर कार्यरत है। कार्यक्रम में संस्थान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आदित्यानंद, साध्वी श्वेता भारती, वसुधा भारती, ज्योति भारती, हेमा भारती, वंदना भारती, राकेश मोहन गोयल, रामकिशन बंधु, मंगलसेन गर्ग, हरिकिशन गर्ग, योगेन्द्र गुप्ता, छिद्दालाल गोयल, अरविंद भारतीय, पूर्व सैन्यकर्मी सुखबीर त्यागी, मनोज गुप्ता, राम अग्रवाल, दिनेश गोयल, मुकेश गोयल, मयंक कौशिक, रजत गर्ग, अभिषेक वर्मा, अजय गुप्ता, राजेश सिंघल, संजीव त्यागी, विनोद धनगर, अनिल गोयल सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
