वीडियो कॉन्फ्रेंस में डीआईजी नैथानी ने की मिशन शक्ति की समीक्षा: महिला सुरक्षा को परिणाम आधारित बनाने पर जोर

Rashtriya Shikhar
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DIG Naithani reviewed Mission Shakti in a video conference: Emphasis on making women’s safety results-oriented IMAGE CREDIT TO POLICE

मेरठ (शिखर समाचार) महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन को केंद्र में रखकर चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान की व्यापक समीक्षा मेरठ परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक कलानिधि नैथानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की। परिक्षेत्र के चारों जनपदों मेरठ, बुलन्दशहर, बागपत और हापुड़ के मिशन शक्ति नोडल अधिकारी ऑनलाइन गोष्ठी में शामिल हुए, जहां मिशन शक्ति फेज 5.0 के 11 बिंदुओं और डीजी परिपत्र 38 के अनुपालन पर गहराई से मंथन हुआ। समीक्षा में अब तक हुई कार्यवाही का आंकलन, आगामी रणनीति और प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारियों की स्पष्ट रूपरेखा तय की गई।

मिशन शक्ति केंद्रों ने 2943 मामलों में दी राहत, 1491 मामलों में काउंसलिंग से सफल समाधान

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22 सितंबर से 18 नवंबर 2025 के बीच मिशन शक्ति केंद्रों पर कुल 2943 प्रार्थना पत्र दर्ज किए गए। इनमें से 874 मामलों का निस्तारण उसी दिन कर पीड़ित महिलाओं को तत्काल राहत दी गई। 2069 प्रार्थना पत्रों पर परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई, जिनमें 1491 मामलों में काउंसलिंग सफल रही और दोनों पक्षों में समाधान हो गया। वहीं 388 मामलों में काउंसलिंग के बाद मुकदमा दर्ज किया गया।

जनपदवार यदि स्थिति देखें तो मेरठ में कुल 1441 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें 749 मामलों में काउंसलिंग हुई और 472 मामलों में समाधान निकला। 180 मामलों में अभियोग दर्ज किया गया, जबकि 692 प्रार्थना पत्र ऐसे रहे जिनमें काउंसलिंग की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। बुलन्दशहर में 826 प्रार्थना पत्र आए, 736 पर काउंसलिंग हुई और 560 मामलों में परामर्श सफल रहा। 127 प्रकरणों में मुकदमा दर्ज किया गया तथा 90 प्रार्थना पत्र बिना काउंसलिंग समाधान योग्य पाए गए। बागपत में कुल 219 प्रार्थना पत्र मिले, 170 में काउंसलिंग कराई गई, 115 सफल रहीं और 28 में अभियोग लिखा गया। हापुड़ में 457 प्रार्थना पत्र दर्ज हुए, जिनमें 414 में काउंसलिंग हुई, 344 मामलों में समाधान हुआ और 53 प्रकरणों में मुकदमे पंजीकृत किए गए।

डीआईजी ने मिशन शक्ति केंद्रों के त्वरित निस्तारण और प्रशिक्षित स्टाफ पर दिए अहम निर्देश

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समीक्षा बैठक में डीआईजी ने नोडल अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए नए कर्मियों को निरंतर प्रशिक्षित किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध रहे। मिशन शक्ति केंद्रों का निरीक्षण केंद्र प्रभारी द्वारा प्रतिदिन, थाना प्रभारी द्वारा साप्ताहिक, अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा पाक्षिक और पुलिस अधीक्षक द्वारा मासिक रूप से अनिवार्य किया गया। संवेदनशील मामलों में मनोवैज्ञानिक सलाहकारों की मदद लेने, पीड़िताओं को शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया समझाने तथा महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों का त्वरित और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘पीड़िता के द्वार पर न्याय’ की भावना के साथ पोक्सो सहित गंभीर मामलों में महिला पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे और आवेदन दर्ज करे। बीट पुलिस कर्मियों को अपने इलाके में भ्रमण के दौरान महिलाओं से जुड़ी शिकायतें चिन्हित करने और अधिक से अधिक काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए गए। स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक परिवहन स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में एंटी-रोमियो स्क्वॉड और महिला पुलिस की नियमित गश्त को और प्रभावी बनाने तथा मनचलों पर कठोर निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। समीक्षा बैठक का उद्देश्य मिशन शक्ति अभियान को जमीनी स्तर पर अधिक परिणामदायी बनाना रहा, ताकि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित राहत, संवेदनशीलता और जवाबदेही का माहौल और मजबूत हो सके।

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