शामली (शिखर समाचार)। फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम के लिए जिलाधिकारी आलोक यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम एवं प्रबंधन को लेकर आयोजित बैठक में डीएम ने कहा कि गांवों में नियमित बैठकें कर किसानों को फसल अवशेष न जलाने और उसके उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटनाएं सामने आने पर शासनादेश के अनुसार जुर्माने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शहरी क्षेत्रों में कूड़ा या अन्य अवशेष जलाने की घटना मिलने पर संबंधित अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लेखपाल और ग्राम सचिव की जवाबदेही निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगी।
फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने का प्रावधान
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि वाले मामलों में पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 30 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। डीएम ने इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने को कहा। उन्होंने गन्ना तौल केंद्रों, गन्ना समितियों, धर्मकांटों, बीज-खाद गोदामों और धुलाई केंद्रों पर किसानों को जागरूक करने के साथ सामाजिक माध्यमों सहित अन्य प्रचार माध्यमों से अभियान चलाने के निर्देश दिए। उपजिलाधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को गांवों में बैठकें कर फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों और उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी देने को कहा गया।
जागरूकता प्रचार वाहनों को दिखाई हरी झंडी
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डीएम ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के क्रम में घटनाओं की निगरानी की जा रही है। बैठक के बाद डीएम आलोक यादव और अपर जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने जागरूकता प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बैठक में परिवर्तन योजना की भी समीक्षा हुई। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि 1075 के लक्ष्य के सापेक्ष 23 वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। डीएम ने प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला पूर्ति अधिकारी और प्रदूषण विभाग को भी संबंधित मानकों व निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने को कहा गया।
