शामली (शिखर समाचार)। शामली-मुजफ्फरनगर मार्ग स्थित देव हॉस्पिटल में छह अक्टूबर को हुई फायरिंग और मारपीट की घटना की विवेचना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गांव सौता रसूलपुर निवासी सुहैब अली ने भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों के साथ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराने के बावजूद उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। पीड़ित ने संबंधित विवेचक की भूमिका की जांच कराने और मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल में फायरिंग और मारपीट, पुलिस अधीक्षक से की शिकायत
शिकायती पत्र में सुहैब अली ने बताया कि छह अक्टूबर की रात करीब 8:40 बजे सिसौली अड्डे के निकट स्थित देव हॉस्पिटल में उनके रिश्तेदार रिजवान की पत्नी की डिलीवरी हुई थी। इसी दौरान मरीज को देखने पहुंचे सुहैब और उनके तीन साथियों के साथ अस्पताल परिसर में अभद्रता और गाली-गलौज की गई। आरोप है कि महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी दौरान अस्पताल संचालक नरदेव के पुत्र आर्यन ने कथित रूप से अवैध पिस्टल से सुहैब, नाजिम, अरमान, जीशान और आरिफ पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। जान बचाने के लिए सभी को मौके से भागना पड़ा। आरोप है कि फायरिंग के दौरान एक गोली उनकी बोलेरो गाड़ी का शीशा पार करते हुए चालक के बगल वाली सीट में जा लगी।
सीसीटीवी फुटेज न्यायालय में पेश न करने पर उठाए सवाल
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सुहैब का दावा है कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई थी और उनकी मौजूदगी में डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) पुलिस को सौंपा गया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी आर्यन को फॉर्च्यूनर गाड़ी और पिस्टल सहित गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद विवेचना के दौरान सीसीटीवी फुटेज न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए गए। उन्होंने डीवीआर की सुपुर्दगी, पुलिस अभिरक्षा से जुड़े अभिलेखों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।
इस दौरान सांता प्रधान, कपिल खाटियान, मास्टर जाहिद, मोहित शर्मा, अमरपाल बालियान, योगेंद्र पंवार और मास्टर आरिफ सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
