हमीरपुर (शिखर समाचार)। दीपावली के बाद आने वाली कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को यमुना बेतवा संगम तट पर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अनोखा संगम दिखाई दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला घाटों की ओर उमड़ पड़ा। लोगों ने ठंडी हवाओं के बीच यमुना के निर्मल जल में आस्था की डुबकी लगाई और जय यमुना मैया के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान की आराधना और सामूहिक आरती की।
यमुना-बीतेवा संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब, घाटों पर बना उत्सवमय दृश्य
यमुना किनारे बने विभिन्न घाटों और बेतवा संगम स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। प्रशासन के अनुसार इस वर्ष पिछले साल की तुलना में अधिक लोगों ने संगम में स्नान किया। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने घाटों पर पूजा अर्चना कर दीपदान किया और पारिवारिक मंगल की कामना की। नगर की गलियों से लेकर घाटों तक मेले जैसा माहौल बना रहा। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में दीप लेकर घाटों पर पहुंचीं, जिससे दृश्य अत्यंत मनमोहक हो उठा।
हमीरपुर शहर, जो यमुना और बेतवा नदियों के संगम से अपनी विशिष्ट पहचान रखता है, हर वर्ष इस अवसर पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को आकर्षित करता है। यहां बेतवा नदी लगभग पांच किलोमीटर आगे जाकर यमुना में मिल जाती है और यही संगम स्थल कहलाता है। इस पवित्र स्थल पर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालु स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। इस बार भी लोगों ने नावों के जरिए परिवार व मित्रों के साथ संगम तक पहुंचकर स्नान, पूजा-पाठ और सामूहिक भोजन का आनंद लिया।
सुरक्षित और सुव्यवस्थित संगम: सफाई अभियान और सुरक्षा इंतजाम जोर-शोर से
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नगर पालिका अध्यक्ष कुलदीप निषाद ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए संगम तट और घाटों की सफाई अभियान युद्धस्तर पर कराया गया। प्रशासन ने महिलाओं और पुरुषों के स्नान की अलग-अलग व्यवस्था की, वहीं सुरक्षा के लिए पुलिस बल लगातार गश्त करता रहा। घाटों पर रस्सियां बांधकर सुरक्षित स्नान की व्यवस्था की गई थी। पुलिस कर्मी लगातार लाउडस्पीकर से श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने की अपील कर रहे थे।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में जमकर खरीदारी की और विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया। पकौड़ी, जलेबी, कचौरी, हलवा-पराठा और चाऊमीन की दुकानों पर भारी भीड़ रही। बच्चे झूले और खिलौनों में मग्न दिखे, जबकि महिलाएं पूजन सामग्री और पारंपरिक आभूषणों की दुकानों पर जुटी रहीं। संगम तट पर दीपों की झिलमिलाहट और भक्तिमय संगीत ने ऐसा मनोहारी दृश्य रचा कि हर कोई भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। कार्तिक पूर्णिमा पर यमुना-बेतवा संगम एक बार फिर जीवंत हो उठा जहां श्रद्धा, संस्कृति और उत्सव का मिलन भाव सभी के हृदय को स्पंदित कर गया।
