गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
स्वाट/सर्विलांस टीम नगर जोन एवं थाना कोतवाली नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बीमा पॉलिसी बेचने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 15 हजार रुपये नकद और 1 मारुति बलेनो कार बरामद की।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने करीब 2.5 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया था। साथ ही चार राज्यों में दर्जनों साइबर ठगी की घटनाओं का भी अनावरण किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान पंकज शर्मा, आदित्य यादव उर्फ मोनू और प्रमोद हरीश चंद्र छेबड़े के रूप में हुई है। तीनों को थाना कोतवाली नगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
बीमा कंपनी के डाटा का दुरुपयोग कर बनाते थे लोगों को निशाना
पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वह पहले नोएडा स्थित एक बीमा ब्रोकिंग कंपनी में कॉलिंग का कार्य करते थे। वहीं से उन्हें बीमा पॉलिसी धारकों का डाटा और ग्राहकों की जानकारी मिली, जिसका बाद में साइबर ठगी के लिए दुरुपयोग किया गया।
आरोपी लैप्स हो चुकी बीमा पॉलिसियों के ग्राहकों को फोन कर स्वयं को बीमा कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताते थे। इसके बाद पॉलिसी को दोबारा सक्रिय कराने या नई पॉलिसी देने का झांसा देकर उनसे विभिन्न बैंक खातों में धनराशि जमा करा लेते थे।
लोगों का विश्वास जीतने के लिए आरोपी लैपटॉप में फोटो एडिटिंग एप की मदद से फर्जी रसीदें तैयार करते थे और इंटरनेट से बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के पहचान पत्र डाउनलोड कर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजते थे। गिरोह के सदस्य अलग-अलग फर्जी नामों से बीमा एजेंट बनकर लोगों से संपर्क करते थे, जबकि बैंक खाते और अन्य संसाधन उन्हें उनके साथी उपलब्ध कराते थे।
चार राज्यों में फैला था गिरोह का नेटवर्क, करोड़ों की ठगी का खुलासा
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/town-vending-committee-meeting-in-presence/
गिरोह ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाया है। पुलिस को मिले दस्तावेजों से कई पीड़ितों के साथ लाखों रुपये की ठगी के प्रमाण मिले हैं। इनमें एक पीड़ित से 1.12 करोड़ रुपये, जबकि अन्य लोगों से 12.5 लाख, 8 लाख, 6.7 लाख और 2 लाख रुपये तक की ठगी की गई है।
आरोपियों के पास से कई संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनके आधार पर अन्य मामलों की जांच जारी है। डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और मामले में फरार अन्य अभियुक्तों की तलाश की जा रही है।
बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर साइबर ठगी से जुड़े और मामलों का पता लगाया जा रहा है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी बीमा पॉलिसी से संबंधित कॉल आने पर उसकी पुष्टि संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से अवश्य करें और किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर धनराशि जमा न करें।
