जीन थेरेपी और क्रिस्पर तकनीक से गंभीर रोगों के इलाज की बढ़ी उम्मीद

Rashtriya Shikhar
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Gene Therapy and CRISPR Technology Raise Hopes for Treating Serious Diseases IMAGE CREDIT TO इंस्टीट्यूट

हापुड़ (शिखर समाचार)। सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डीबीटी-सीटीईपी के अंतर्गत लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला के दूसरे सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय जीन थेरेपी, क्रिस्पर और कोशिका आधारित उपचार रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। दीप प्रज्वलन जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन, प्राचार्य प्रो. डॉ. नितिन कुमार तथा आमंत्रित विशेषज्ञ जामिया हमदर्द की डॉ. निधि, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. सुभाष चंद्र सोनकर और गलगोटियास कॉलेज की डॉ. एस. सुल्ताना ने किया।

विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को जीन संपादन, क्रिस्पर तकनीक के चिकित्सकीय उपयोग, कोशिका आधारित उपचार तथा औषधि जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की ये तकनीकें गंभीर और जटिल रोगों के उपचार में नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं। व्याख्यान के बाद आयोजित सवाल-जवाब सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे।

जीन संपादन और क्रिस्पर तकनीक के उपयोग बताए

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प्राचार्य डॉ. नितिन कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। संस्थापक चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन और वाइस चेयरपर्सन डॉ. राम्या रामचंद्रन ने कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

सवाल-जवाब सत्र में विद्यार्थियों ने पूछे प्रश्न

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कार्यक्रम का संचालन मनीष सम्याल और नेहा वर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अरुण कुमार ने दिया। आयोजन में डॉ. नेहा सिंह, डॉ. सुप्रियो मैती, डॉ. रश्मि शर्मा सहित कॉलेज के सभी शिक्षकों का सहयोग रहा।

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