हापुड़ (शिखर समाचार) दीपावली पर्व के अवसर पर नगर क्षेत्र स्थित शिवा प्राथमिक पाठशाला का परिसर देशभक्ति की भावना से सराबोर नजर आया, जब नन्हें विद्यार्थियों ने एक दीया शहीदों के नाम कार्यक्रम के तहत दीप जलाकर उन अमर जवानों को नमन किया, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। दीपों की लौ में जब बच्चों ने देशभक्ति के गीत गाए तो वातावरण भावनाओं से भर उठा और हर आंख नम हो गई।
हर दिल में जलता दीपक: जब दीपावली बनी देशभक्ति की मिसाल
विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत रंगोली पर दीप प्रज्वलित कर की गई। दीप जलते ही पूरा वातावरण भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा। बच्चों ने गणेश वंदना और भगवान श्रीराम की स्तुति प्रस्तुत कर दीपावली की पावन बेला को और भी दिव्य बना दिया। बच्चों के उत्साह और ऊर्जा से भरे इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि यह हर दिल में जलते उस दीपक की तरह है जो अंधकार मिटाता है।
प्रधानाध्यापिका डॉ. सुमन अग्रवाल ने बच्चों के देशप्रेम की भावना की सराहना करते हुए कहा कि दीपावली केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि यह कृतज्ञता का अवसर भी है। जब हम शहीदों के नाम एक दीप जलाते हैं, तो यह उनके अदम्य साहस और बलिदान के प्रति हमारा सम्मान होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में देशप्रेम, अनुशासन और त्याग की भावना को मजबूत बनाते हैं।
हर दीप एक कहानी: शहीदों को समर्पित श्रद्धा की ज्योत
कार्यक्रम में शिक्षिका नीतू नारंग ने कहा कि शहीदों की याद में जलाया गया हर दीप उनके बलिदान की कहानी कहता है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की स्मृति सदैव हमारे दिलों में अमिट रहेगी।
इस दौरान विद्यालय के बच्चे खुशी, अंशु, अंकित, प्रिंस, महक, सिया, प्रीति, राघव, तान्या, कारण, रोहित, सोनू, साहिल, रेणु, स्नेहा, जोया, परी, कविता, अंश, संस्कार, जानवी, विधि और मनीष देशभक्ति गीतों और नारों से कार्यक्रम को जीवन्त बनाते रहे। दीपों की कतारें जब प्रज्वलित हुईं, तो पूरा विद्यालय परिसर एक पवित्र और प्रेरणादायी दृश्य में बदल गया। अंत में बच्चों और शिक्षकों ने सामूहिक रूप से शहीदों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर कार्यक्रम का समापन किया। दीपों की वह उजास न केवल विद्यालय को आलोकित कर गई, बल्कि हर दिल में यह संकल्प भी जगा गई कि शहीदों के सपनों का भारत तभी बनेगा जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति उतना ही समर्पित रहेगा, जितना एक सैनिक अपने राष्ट्र के प्रति रहता है।
