नई दिल्ली/मथुरा (शिखर समाचार)।
भारतीय सनातन संस्कृति की अस्मिता और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का संकल्प लेकर आगामी 14 से 16 नवंबर 2025 को श्रीधाम वृंदावन के पावन घाटों पर राष्ट्र निर्माण का महायज्ञ धर्म संसद आयोजित की जाएगी। इस विराट धर्मसभा में देश के कोने-कोने से साधु-संत, आचार्य, विद्वान और राष्ट्रभक्त समाज बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
ज्ञापन सौंप प्रधानमंत्री से की अपील
इस महाआयोजन की घोषणा मानसरोवर गार्डन दिल्ली से की गई, जहां नारायणी सेना न्यास के पदाधिकारियों ने आचार्य मनमोहन रामानुज जी के साथ मिलकर देश के वरिष्ठ अधिवक्ता और संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ए. पी. सिंह को बतौर विशिष्ट अतिथि आमंत्रित किया। ठाकुर बांके बिहारी जी कॉरिडोर प्रकरण में अपनी जीत दिलाने के बाद साधु-संत समाज ने उन्हें साधुवाद दिया और इस विजय को सनातन संस्कृति की जीत करार दिया। इस मौके पर ठाकुर आदित्य वत्स और डॉ. अनीश आचार्य सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
नारायणी सेना और संत समाज ने 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर भारतीय सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु अपनी मांगों पर तत्काल कदम उठाने की अपील की। ज्ञापन में यह उल्लेख किया गया कि 2020 से लेकर अब तक संगठन द्वारा क्रमिक अनशन, आमरण अनशन, हस्ताक्षर अभियान और ज्ञापन सौंपे जाते रहे हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण विषय अभी भी उपेक्षित हैं।
मुख्य माँगें और प्रस्ताव
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मुख्य माँगें और प्रस्ताव में प्रमुख रूप से गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने: गौ तस्करी व गौ हत्या पर रोक लगाकर गाय को राष्ट्र गौरव के प्रतीक के रूप में स्थापित करने की मांग की गई।
माँ यमुना की निर्मल धारा: दिल्ली से आगरा तक नालों के समानांतर वैकल्पिक व्यवस्था और हथिनी कुंड से यमुना की मुक्ति पर जोर दिया गया।
भारत को सनातन राष्ट्र घोषित करने की मांग: संगठन का कहना है कि लव जिहाद, अवैध मजार निर्माण और जनसंख्या जिहाद जैसी चुनौतियों के बीच सनातन संस्कृति को सुरक्षित करने के लिए यह अनिवार्य है।
मठ-मंदिरों की स्वतंत्रता और विश्व सनातन ट्रस्ट बोर्ड का गठन: गुरुकुल, गौशालाओं और पुजारियों के संरक्षण हेतु स्थायी व्यवस्था हो।
न्याय प्रणाली में सुधार: भ्रष्टाचार-मुक्त और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
बांके बिहारी कॉरिडोर में संशोधन: सप्तदेवालयों के संरक्षण और वृंदावन की प्राचीन गरिमा को बचाने की पहल की जाए।
आरक्षण नीति में परिवर्तन: जातिगत आधार समाप्त कर केवल आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को ही लाभ मिले।
गुरुकुल शिक्षा का पुनर्जीवन: हर जिले में आधुनिकता और वैदिक संस्कारों से युक्त गुरुकुल की स्थापना हो।
अश्लीलता पर रोक: फिल्मों व सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली आपत्तिजनक सामग्री पर नियंत्रण की मांग।
बालिका शिक्षा और स्वावलंबन: वैदिक पद्धति से लैस बालिका गुरुकुल शुरू किए जाएं, जहाँ शास्त्र, शस्त्र और योग शिक्षा पर बल दिया जाए।
महामना राजीव दीक्षित को भारत रत्न: उनकी रहस्यमयी मृत्यु की जांच और उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की अपील।
धर्म संसद का संदेश
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धर्म संसद का उद्देश्य केवल मांगें उठाना नहीं बल्कि राष्ट्र को उसकी मूल सनातन धारा से जोड़ना है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में भारत की आध्यात्मिक धरोहर, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्र निर्माण के लिए व्यापक मंथन किया जाएगा।
धर्मो रक्षति रक्षिता, नमो नारायण के उद्घोष के साथ यह आयोजन न केवल सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत के सांस्कृतिक भविष्य का मार्गदर्शन भी करेगा।
