प्रयागराज (शिखर समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता अपूर्व हजेला की प्रभावी दलीलों, मजबूत पैरवी और विधिक कार्रवाई के चलते बैंक ऋण से जुड़े करीब 22 वर्ष पुराने आपराधिक मामले में बिजेंद्र जैन को बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने दिए आदेश में बिजेंद्र जैन के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि संबंधित ऋण की पूरी राशि पहले ही अदा की जा चुकी है और ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं रह गया है।
मामला अपराध संख्या 23/2004 से संबंधित था, जो गाजियाबाद के कोतवाली थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत दर्ज किया गया था। आरोप था कि बैंक अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर जाली दस्तावेजों के माध्यम से खाते खोले गए और ऋण दिलाया गया, जिसकी अदायगी नहीं होने से बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ।
बैंक जांच समिति की रिपोर्ट और समझौते का प्रस्ताव बना अहम आधार
अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए बताया कि बैंक ने स्वयं मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी। समिति ने 23 अगस्त 2010 को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद बैंक की प्रशासनिक समिति ने मामले के समझौते के संबंध में प्रस्ताव पारित किया और मई 2011 में बैंक की ओर से न्यायालय में समझौते के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था।
पूरा ऋण चुकाने के बाद हाईकोर्ट ने खत्म की कार्रवाई
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पैरवी के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि संबंधित फर्म का पूरा ऋण 18 मई 2015 को चुका दिया गया था। बैंक की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया। न्यायालय ने इन परिस्थितियों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि ऋण की पूरी राशि अदा हो चुकी है और दोषसिद्धि की संभावना अत्यंत कम है।
इसके आधार पर हाईकोर्ट ने बिजेंद्र जैन के संबंध में अपराध संख्या 23/2004 से उत्पन्न पूरी आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी तथा आदेश की प्रति संबंधित न्यायालय को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया।
