मुरादनगर (शिखर समाचार)। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक मुकेश कुमार शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए चीरहरण लीला, गोपी विरह तथा रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया।
चीरहरण लीला में दिया समर्पण और भक्ति का संदेश
कथावाचक ने चीरहरण लीला का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के अहंकार का नाश कर उन्हें पूर्ण समर्पण और भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों से निष्कपट प्रेम और समर्पण चाहते हैं। कथा के माध्यम से उन्होंने समझाया कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता।
गोपी विरह प्रसंग सुनाते हुए मुकेश शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों का प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। जब श्रीकृष्ण मथुरा चले गए तो गोपियां उनके विरह में व्याकुल हो उठीं। कथा के भावपूर्ण वर्णन से अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
रुक्मिणी विवाह प्रसंग में हुआ पुष्पवर्षा से उत्सव
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इसके उपरांत रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया, तब रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी रक्षा की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया। इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का उत्सव मनाया।
इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
