नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार)।
कृषि विज्ञान केंद्र नगीना पर कृषि विभाग द्वारा उर्वरकों के संतुलित उपयोग विषय पर कृषकों, इनपुट डीलर्स एवं विभागीय कर्मचारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेषज्ञों की चर्चा
सोमवार को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित टीम के सदस्य डॉ. आर. एस.एच. श्रीवास्तव, डॉ. एस. बरुआ एवं देवदत्त ने प्रतिभाग किया। टीम के सदस्यों ने उपस्थित प्रतिभागियों से उर्वरकों के संतुलित उपयोग के तरीकों पर चर्चा की तथा जनपद में उर्वरकों की अधिक खपत के कारणों को समझने के लिए विस्तृत सर्वे भी किया।
जैविक खेती और ढैंचा बीज पर जोर
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कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी जसवीर तेवतिया ने कहा कि जनपद में मृदा की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के उद्देश्य से किसानों को ढैंचा बीज 500 कुंतल से अधिक मात्रा में 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही जैविक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने, किसानों के खेतों पर जैविक उर्वरक उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना तथा राइजोबियम कल्चर व एजोटोबैक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
फसलों में संतुलित उपयोग की जानकारी
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. के. के. सिंह ने बताया कि केंद्र की टीम वर्तमान में कृषि विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, गन्ना विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर उर्वरकों के संतुलित उपयोग प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गन्ना, धान और गेहूं की फसलों में उर्वरकों के संतुलित उपयोग का चार्ट भी समझाया जा रहा है, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखा जा सके।
