एआई और विधि पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन, विशेषज्ञों ने रखे अहम विचार

Rashtriya Shikhar
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Grand national seminar on AI and law organized, experts shared key insights IMAGE CREDIT TO Grand national seminar on AI and law organized, experts shared key insights IMAGE CREDIT TO इंस्टीट्यूट

ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। जिम्स इंजीनियरिंग मैनेजमेंट टेक्निकल कैंपस के विधि विभाग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं विधि विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। वर्तमान दौर में एआई के बढ़ते प्रभाव और उसके विधिक आयामों को समझने के उद्देश्य से आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के विश्वविद्यालयों, विधि संस्थानों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

संगोष्ठी का आयोजन और उद्घाटन

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कार्यक्रम संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अमित गुप्ता के मार्गदर्शन, निदेशक प्रो. (डॉ.) सचिन यादव के निर्देशन तथा विधि विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पल्लवी गुप्ता के शैक्षणिक नेतृत्व में संपन्न हुआ। संगोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञ वक्ताओं ने एआई और विधि से जुड़े समकालीन विषयों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों ने साझा किए एआई के विधिक आयाम

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विशेषज्ञ वक्ताओं में हितैषी त्रिवेदी, तुषार रोहिल्ला एवं अधिवक्ता अविनाश गौर ने बताया कि एआई न्याय प्रणाली, डेटा संरक्षण, गोपनीयता अधिकार, साइबर अपराध और नीति निर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के बढ़ते उपयोग के साथ विधिक ढांचे में सुधार और संतुलन आवश्यक है, ताकि तकनीक का उपयोग जवाबदेह और न्यायसंगत तरीके से हो सके।

शोध पत्र प्रस्तुति और समापन

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संगोष्ठी में देशभर के प्रतिभागियों ने न्यायिक प्रक्रियाओं में एआई, एल्गोरिदमिक उत्तरदायित्व, डिजिटल अधिकार, डेटा सुरक्षा और तकनीकी नैतिकता जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुधीर कुमार द्विवेदी के नेतृत्व में तथा सह-संयोजक गौरव यादव और विवेक त्रिवेदी के सहयोग से आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन सत्र में प्रमुख झलकियां प्रस्तुत की गई और उत्कृष्ट शोध पत्रों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर यह निष्कर्ष सामने आया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की विधि व्यवस्था को गहराई से प्रभावित करेगी और इसके अनुरूप विधिक ढांचे का विकास अत्यंत आवश्यक है।

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