हापुड़ (शिखर समाचार) थाना हापुड़ क्षेत्र में गश्त के दौरान पुलिस को एक 12 वर्षीय किशोरी सड़क किनारे अकेली और घबराई हालत में खड़ी मिली। शक होने पर पुलिस ने गाड़ी रोककर जब उससे पूछताछ की तो मामला बेहद गंभीर निकला। किशोरी ने बताया कि वह अपनी मां के साथ यहां आई थी, लेकिन मां उसे सड़क पर छोड़कर कहीं चली गई और अब वापस नहीं लौटी। बच्ची दो दिनों तक वहीं मां का इंतजार करती रही।
पिता सामने खड़े थे… पर मासूम ने कहा— मैं उनके साथ नहीं जाऊँगी
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को तत्काल संरक्षण में लिया और उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस ने उसकी पहचान और परिजनों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान जानकारी मिली कि बच्ची लोनी क्षेत्र की रहने वाली है। सूचना मिलने पर रविवार को उसका पिता उसे लेने वन स्टॉप सेंटर पहुंचा, लेकिन उस समय सभी को उस वक्त हैरानी हुई जब किशोरी ने पिता के साथ घर जाने से साफ इंकार कर दिया।
किशोरी ने बताया कि उसके पिता की दूसरी पत्नी यानी सौतेली मां उससे घर के सभी काम जबरन करवाती है और उसे मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया जाता है। बच्ची ने स्पष्ट कहा कि वह फिर से उसी माहौल में नहीं जाना चाहती, जहां उसे सिर्फ बोझ समझा जाता है।
बचाव की ढाल बनेगा बालिका गृह— न्यायपीठ ने कहा, अब पहले उसका भविष्य सुरक्षित होगा
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मामले की जानकारी मिलने पर बाल न्यायपीठ के अध्यक्ष अभिषेक त्यागी ने बताया कि बच्ची की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे बालिका गृह भेजे जाने का निर्णय लिया गया है, ताकि उसके भविष्य और मानसिक स्थिति की पूरी तरह से देखभाल की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की गहन जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों की तत्परता से किशोरी को सुरक्षित ठिकाना मिल सका, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे कितने मासूम अब भी भीतर ही भीतर टूट रहे हैं।
