लखनऊ (शिखर समाचार) अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ी कथित आतंकी गतिविधियों के खुलासे के बाद विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान पवित्र भूभाग पर कलंक की तरह खड़ा है, और इसे तत्काल ध्वस्त कर पांडवों के नाम पर ‘पांडव वेद विद्यापीठ गुरुकुल’ की स्थापना की जानी चाहिए। राय का कहना है कि जब यह इलाका महाभारतकालीन अज्ञातवास की पवित्र स्मृतियों को थामे हुए है, तब यहां ऐसे विवादित संस्थान का अस्तित्व असहनीय है।
अज्ञातवास की धरती पर वैदिक गुरुकुल: अल-फलाह क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नया आयाम
राय ने दावा किया कि जिस क्षेत्र में अल-फलाह विश्वविद्यालय स्थित है, उसी आसपास की भूमि पर माता कुंती और पांचों पांडवों ने अज्ञातवास का समय व्यतीत किया था। यही नहीं, पास के परसोन गांव में स्थित ऋषि पराशर के प्राचीन आश्रम से वेद व्यास द्वारा 18 महापुराणों की रचना होने का इतिहास भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह पूरा इलाका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है, ऐसे में यहां वेद, उपनिषद और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित एक वैदिक गुरुकुल की स्थापना होना समय की मांग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली ब्लास्ट की जांच में अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े कई नाम सामने आना बेहद गंभीर संकेत है। राय ने कहा कि जब जांच में लखनऊ सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों की संलिप्तता का उल्लेख मिल रहा है, तब इस संस्थान को लेकर सवाल और गहरे हो जाते हैं। उनका कहना था कि जिस जगह धर्म, परंपरा और आध्यात्मिकता का केंद्र बनने की क्षमता हो, वहां आतंक से संबंधित गतिविधियों का जिक्र होना अस्वीकार्य है।

राय ने यह भी कहा कि विश्व स्तर पर बढ़ता इस्लामिक आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है और इसे जड़ से समाप्त किए बिना शांति की स्थापना संभव नहीं है। उनका कहना था कि जब तक ऐसे ठिकानों को उड़ाकर खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक समाज सुरक्षा के वास्तविक अर्थ को प्राप्त नहीं कर सकेगा।
इस मौके पर कुलदीप मिश्रा, प्रकाश आर्या, सचिन मिश्रा, ओम शंकर गुप्ता, पंकज अग्रवाल, हिमांशु अवस्थी, हिमांशु धवल, सागर भारद्वाज, अतुल शर्मा, मुदित तिवारी, सुमित शर्मा, बॉबी गुप्ता, राममूर्ति, रामकुमार वर्मा, मनीष राय, सोफी शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
