लखनऊ (शिखर समाचार) विश्व हिंदू रक्षा परिषद कार्यालय में मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने चौंकाने वाला दावा करते हुए बताया कि दिल्ली विस्फोट मामले में गिरफ्तार आतंकियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि कई हिंदूवादी नेता उनकी निगरानी सूची में थे, जिनमें लखनऊ के कुछ चेहरे और उनका नाम भी शामिल था। राय ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी उस समय मिली जब वह मथुरा में बागेश्वर धाम द्वारा आयोजित सनातन एकता पदयात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। उसी दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो से उन्हें फोन आया और उनसे पूछा गया कि उनके घर की रेकी की घटना किस तारीख को हुई थी तथा संदिग्धों के दिखने का विवरण क्या था। उन्होंने अधिकारियों को सीसीटीवी फुटेज सहित पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराया। राय ने बताया कि कुछ संदिग्ध दो से तीन दिनों तक रात में उनके घर के आसपास देखे गए थे और 7 नवंबर की रात लगभग 8:20 बजे दो लोग घर के सामने खाली प्लॉट के पास पेड़ की ओट में खड़े होकर लगातार घर की दिशा में देखते पाए गए। बाद में रात 8:31 बजे अंधेरा बढ़ने और कुत्तों के भौंकने पर वे सड़क की ओर बढ़ गए, लेकिन लगभग दस मिनट बाद फिर से लौटकर घर की ओर देखने लगे, जिसकी तस्वीरें सीसीटीवी में दर्ज हुईं। इसके तीन दिन बाद ही 10 नवंबर को लाल किला ब्लास्ट की घटना सामने आई। उन्होंने कहा कि पूरा मामला पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव गृह, स्थानीय पुलिस और एलआईयू को भेजा जा चुका है।
गोपाल राय ने उठाए सुरक्षा की गंभीर चूक के सवाल—हमले की आशंका के बीच लापरवाही उजागर
गोपाल राय ने कहा कि वह कई मामलों में जैश-ए-मोहम्मद के सदस्यों, आईएसआई से जुड़े एजेंटों और सिद्धार्थ नगर निवासी शमशूल हुदा जैसे संदिग्धों का खुलासा कर चुके हैं। इसके अलावा देश के सबसे बड़े धर्मांतरण रैकेट के सरगना जमालुद्दीन उर्फ छंगुर बाबा की गिरफ्तारी भी उनकी सक्रियता के कारण हुई थी। संभव है कि इन्हीं कारणों से जांच एजेंसियों को यह संकेत मिला हो कि आतंकी गुट उनकी गतिविधियों को लेकर हमले की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से हिंदुत्व और सनातन के मुद्दों को लेकर देशभर में कार्य कर रहे हैं। 2019 से 2024 तक उन्हें सुरक्षा प्रदान थी, परंतु बाद में एसीपी एलआईयू अवधेश चौधरी की साजिश के चलते सुरक्षा वापस ले ली गई। इससे पहले 2018 में जनपदीय सुरक्षा समिति लखनऊ ने उन्हें एक्स श्रेणी की सुरक्षा देने की संस्तुति शासन को भेजी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिरकार सुरक्षा क्यों हटाई गई, जबकि जम्मू में 30 अक्टूबर 2015 और वाराणसी में 28 फरवरी 2006 को उन पर जानलेवा हमले हो चुके हैं। राय ने कहा कि वह लगातार अपनी गतिविधियों की जानकारी उच्चाधिकारियों को देते रहे हैं और धमकी मिलने पर हर बार पुलिस व प्रशासन को अवगत कराया है, इसके बावजूद उनकी सुरक्षा पर गंभीर लापरवाही की गई जो आज बड़े खतरे के रूप में सामने आ रही है।
