नई दिल्ली (शिखर समाचार) संघ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2026 की सिविल सेवा तथा भारतीय वन सेवा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन और परीक्षा संचालन प्रणाली में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। आयोग का उद्देश्य अभ्यर्थियों को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था विशेष रूप से दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें परीक्षा केंद्र चयन में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा के लिए 933 और भारतीय वन सेवा परीक्षा के लिए 80 पदों की रिक्तियां घोषित की हैं।
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आयोग ने आवेदन प्रक्रिया को सरल और तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नया ऑनलाइन आवेदन मंच विकसित किया है। यह मंच आवेदन भरने से लेकर परीक्षा प्रबंधन तक की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत रूप में संचालित करेगा। नई प्रणाली से अभ्यर्थियों को आवेदन में होने वाली त्रुटियों से बचने और समय की बचत में सहायता मिलेगी, साथ ही परीक्षा से जुड़े सभी चरणों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
दिव्यांग अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए परीक्षा केंद्र आवंटन के नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। अब दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए किसी भी परीक्षा केंद्र की सीट संख्या की सीमा लागू नहीं होगी। पहले निर्धारित क्षमता पूरी होते ही केंद्र चयन बंद हो जाता था, जिससे कई अभ्यर्थियों को दूरस्थ स्थान चुनने पड़ते थे। संशोधित व्यवस्था के अनुसार किसी केंद्र की सामान्य क्षमता पूरी होने पर वह केंद्र सामान्य अभ्यर्थियों के लिए बंद हो जाएगा, लेकिन दिव्यांग अभ्यर्थी उसी केंद्र का चयन करते रह सकेंगे। आवश्यकता होने पर अतिरिक्त बैठक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के परीक्षा आंकड़ों के अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली, कटक, पटना और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों के परीक्षा केंद्र बहुत जल्दी भर जाते हैं। इससे दिव्यांग अभ्यर्थियों को विशेष कठिनाई होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दिव्यांग अभ्यर्थियों को अपने मनचाहे केंद्र पर परीक्षा देने का अवसर सुनिश्चित होगा।
नए परीक्षा केंद्र और तकनीकी सुधार: अभ्यर्थियों के लिए सुविधा, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित
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परीक्षा केंद्रों पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से आयोग ने नए शहरों को भी परीक्षा केंद्रों की सूची में शामिल किया है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए मेरठ, कानपुर और भुवनेश्वर को नए केंद्र के रूप में जोड़ा गया है, जिससे कुल केंद्रों की संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है। मुख्य परीक्षा के लिए भुवनेश्वर, श्रीनगर और इम्फाल को शामिल करते हुए केंद्रों की संख्या 24 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है। इससे विभिन्न क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को नजदीक में परीक्षा देने की सुविधा मिलेगी।
नए आवेदन मंच में केंद्र चयन से जुड़ी एक अतिरिक्त सुविधा भी दी गई है। अभ्यर्थी निर्धारित परीक्षा केंद्रों के अलावा अपने नजदीकी पसंदीदा शहरों का भी चयन कर सकेंगे। आयोग इस जानकारी को अभ्यर्थी रुचि सर्वेक्षण के रूप में संकलित करेगा और भविष्य में जहां संभव होगा, वहां नए परीक्षा केंद्र स्थापित करने पर विचार करेगा।
परीक्षा की शुचिता और पहचान सत्यापन को मजबूत बनाने के लिए फोटो मिलान और चेहरा पहचान तकनीक को भी प्रणाली में जोड़ा गया है। इससे परीक्षा के विभिन्न चरणों में अभ्यर्थी की पहचान की पुष्टि अधिक सटीक ढंग से हो सकेगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्थाएं निष्पक्ष चयन, पारदर्शी प्रक्रिया, समावेशी भागीदारी और अभ्यर्थी सुविधा को ध्यान में रखकर लागू की गई हैं। परीक्षा प्रणाली को समयानुकूल और विश्वसनीय बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
