अशोक सिंघल के योगदान को किया याद, बिजनौर में जन्म शताब्दी समारोह में जुटे प्रमुख संत और नेता

Rashtriya Shikhar
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Tribute Paid to Ashok Singhal’s Contributions at Birth Centenary Celebration in Bijnor; Prominent Saints and Leaders Gather for the Event IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

बिजनौर (शिखर समाचार)। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष दिवंगत अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी समारोह वर्ष के अवसर पर स्थानीय प्रदर्शनी मैदान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और महामंडलेश्वर स्वामी राजराजेश्वर आश्रम महाराज सहित अनेक प्रमुख लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में अशोक सिंघल के जीवन, संघर्ष और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान को याद किया गया।

अशोक सिंघल के योगदान को किया याद, श्रीराम मंदिर आंदोलन में भूमिका ऐतिहासिक बताई

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समारोह को संबोधित करते हुए सतीश महाना ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में निर्मित भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण की यात्रा में अशोक सिंघल का योगदान ऐतिहासिक रहा है। वक्ताओं ने देश की एकता, अखंडता, सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कारों के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।

चंपत राय ने साझा किए आंदोलन के संघर्ष, संतों की ऐतिहासिक पदयात्रा का किया उल्लेख

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श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े चंपत राय ने हिंदू धर्म की विकास यात्रा और अशोक सिंघल के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने अतीत के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए बताया कि एक समय पंजाब में साइकिल से भ्रमण करना भी जोखिम भरा था। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सामाजिक समरसता का संदेश देने के लिए हरिद्वार से 300 संतों की ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली गई थी। उन्होंने अशोक सिंघल के प्रयासों और आंदोलन के दौरान सामने आई चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

महामंडलेश्वर स्वामी राजराजेश्वर आश्रम महाराज ने हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं पर विचार रखे। समारोह में उपस्थित लोगों ने अशोक सिंघल के जीवन से प्रेरणा लेने तथा सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।

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