गंदे तालाबों को संवारा, उसी में साधा खेल का हुनर; सहारनपुर के छह खिलाड़ियों ने जीते राष्ट्रीय पदक

Rashtriya Shikhar
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Transformed Polluted Ponds into Training Grounds, Honed Their Sporting Skills There; Six Players from Saharanpur Win National Medals IMAGE CREDIT TO: REPORTER

सहारनपुर (शिखर समाचार)। गंदगी से पटे तालाबों को साफ कर जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की मुहिम चलाने का प्रयास अब खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिला रहा है। सहारनपुर के ग्रामीण युवाओं ने तालाबों में ड्रैगन बोटिंग का प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। ग्राम पंचायत थरौली में स्थापित ड्रैगन बोटिंग क्लब से प्रशिक्षण प्राप्त छह खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण और पांच रजत पदक अपने नाम किए।

तालाबों के संरक्षण से ग्रामीण युवाओं को मिला खेल का मंच

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ग्राम नैनखेड़ी निवासी इंजीनियर गजेन्द्र सिंह ने पॉडमैन रामवीर तंवर से प्रेरणा लेकर तालाबों को गंदगी से मुक्त कराने और उन्हें जल संचय के योग्य बनाने का अभियान शुरू किया। उनका उद्देश्य तालाबों को दोबारा गंदगी से भरने से बचाने के साथ ग्रामीण युवाओं को खेल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी रहा। इसी सोच के तहत नैनखेड़ी में बोटिंग क्लब स्थापित कर उससे होने वाली आमदनी को झील के रखरखाव में लगाने की व्यवस्था बनाई गई।

राजपुर लतीफपुर में ग्राम प्रधान जोगिंदर सिंह के सहयोग से तालाब की सफाई कर बीच में भगवान शिवशंकर की प्रतिमा स्थापित की गई। बिजनाखेड़ी में ग्राम प्रधान बोबी चौधरी के साथ तालाब के पास मिनी स्टेडियम और जल संचय के लिए दो छोटे तालाब विकसित किए गए। इसी क्रम में थरौली में ग्राम प्रधान रीटा देवी और संदीप चौधरी के सहयोग से गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था करते हुए बड़े तालाब पर ड्रैगन बोटिंग क्लब बनाया गया। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी योगेन्द्र सिंह और मुख्य विकास अधिकारी सुमित महाजन का सहयोग भी इस पहल में महत्वपूर्ण रहा।

राष्ट्रीय ड्रैगन बोट चैंपियनशिप में जीते छह पदक

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दिल्ली के बलस्वा में आयोजित 13वीं राष्ट्रीय ड्रैगन बोट चैंपियनशिप में देश के 30 राज्यों के लगभग 700 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश की ओर से 48 खिलाड़ी प्रतियोगिता में उतरे। सहारनपुर के गजेन्द्र सिंह और संदीप चौधरी ने वरिष्ठ वर्ग में रजत पदक जीते। कनिष्ठ वर्ग में वंश धीमान ने स्वर्ण, जबकि उदित पंवार, अभिज्ञान सिंह और सिद्धांत रोड ने रजत पदक हासिल किए।

यह उपलब्धि साबित करती है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। तालाबों का संरक्षण अब खेल उपलब्धियों और ग्रामीण युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का माध्यम भी बन रहा है।

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