जेवर/ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। यमुना नदी एक बार फिर उफान पर है। पिछले कई दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और हथिनी कुंड बैराज से छोड़े जा रहे पानी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। बुधवार को नदी के जलस्तर में और इजाफा दर्ज किया गया, जिससे खतरे की आशंका और गहरी हो गई है। खेत-खलिहानों में पानी भरने लगा है, कई गांवों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं और किसान मायूसी के साए में खड़े हैं। वहीं प्रशासन स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है और लोगों की सुरक्षा को लेकर तैयारियों में जुट गया है।
जेवर तहसील में बाढ़ से निपटने को पांच राहत केंद्र स्थापित, प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित ठहराव की व्यवस्था
तहसील प्रशासन ने आपदा से निपटने के लिए जेवर क्षेत्र में पाँच बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं। इनमें गांव झुप्पा और मेवला गोपालगढ़ के प्राइमरी स्कूल, जानता इंटर कॉलेज तथा भाईपुर ब्रह्मनान को अस्थायी राहत केंद्रों में बदल दिया गया है। इन जगहों पर बाढ़ प्रभावित परिवारों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित ठहराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही तहसील परिसर में एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से लगातार हालात की निगरानी की जा रही है। तहसीलदार स्वयं प्रभावित गांवों का भ्रमण कर रहे हैं और स्थिति पर रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
पानी छोड़े जाने के कारण गोविंदगढ़, कानीगढ़ी, शमशान नगर, पूरन नगर, कर्रोल, झुप्पा, छोटी झुप्पा और छोटी कानीगढ़ी जैसे करीब दस गांवों के जंगलों में बाढ़ का पानी फैल चुका है। सैकड़ों बीघा खड़ी फसलें डूबकर बर्बाद हो गई हैं। किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाने से ग्रामीणों की चिंता दोगुनी हो गई है। ग्रामीण अब इस बात से डरे हुए हैं कि अगर बारिश का दौर और तेज हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
प्रशासन की सतर्कता और ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ीं, आपदा प्रबंधन के लिए तैयारियां पूरी—फसलों के नुकसान का जल्द आकलन व मुआवजे की मांग जोर पकड़ रही है
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प्रशासनिक अमला लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहा है और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियां कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम कर लिए गए हैं। वहीं ग्रामीणों की ओर से भी यह मांग उठ रही है कि फसलों के नुकसान का आकलन जल्द से जल्द कराया जाए और किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर यमुना का जलस्तर यूं ही बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो जाएंगे। लोग घरों से सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। प्रशासन की चौकियों पर पीने के पानी, दवाइयों और खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं कंट्रोल रूम में अधिकारियों की टीम दिन-रात अलर्ट मोड पर तैनात है। बढ़ते जलस्तर ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण जहां प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे हैं, वहीं प्रशासन हालात को काबू में रखने की कोशिशों में जुटा हुआ है। बारिश थमने और हथिनी कुंड से पानी छोड़े जाने की रफ्तार कम होने तक राहत की उम्मीद नहीं है।
