नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार) तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण तहसील समाधान दिवस इस बार केवल औपचारिकता साबित हुआ। ग्रामीणों की भीड़ तो उमड़ी, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। कुल 40 शिकायतें दर्ज की गईं, पर किसी का भी मौके पर निस्तारण नहीं हो सका। समाधान दिवस का मकसद जनता की समस्याओं को तत्काल सुलझाना होता है, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने पूरे आयोजन को निष्प्रभावी बना दिया।
ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी, तहसील अधिकारियों की अनुपस्थिति से शिकायतें बस दर्ज करने तक सीमित
सुबह से ही ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर तहसील सभागार पहुंचे थे। किसी को राजस्व विभाग से शिकायत थी, तो किसी को विद्युत या पुलिस विभाग से जुड़ी समस्या लेकर उम्मीद थी कि सुनवाई होगी और राहत मिलेगी। मगर अधिकारियों की अनुपस्थिति ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पूरे कार्यक्रम में सिर्फ नायब तहसीलदार अजब सिंह ही मौजूद रहे, जिन्होंने सभी शिकायतें दर्ज कर उन्हें संबंधित विभागों को जांच के लिए भेज दिया।
अधिकारियों की गैरहाजिरी के कारण शिकायतकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि समाधान दिवस केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गया है। शिकायतें दर्ज हो जाती हैं, लेकिन उनका समाधान कब और कैसे होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं होता। कई शिकायतकर्ता तो यह कहते सुने गए कि अब वे ऐसे कार्यक्रमों से कोई उम्मीद नहीं रखते, क्योंकि हर बार नतीजा वही रहता है सुनवाई तो होती है, पर समाधान नहीं।
अधिकारी अनुपस्थिति ने डगमगाया जनता का भरोसा, संपूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य अधूरा रहा
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/we-will-only-succeed-by-making-india/
व्यस्तता के नाम पर अधिकांश विभागीय अधिकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। इससे न केवल जनता का भरोसा डगमगाया, बल्कि शासन के उस उद्देश्य को भी झटका लगा, जिसके तहत हर शनिवार संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन जनता और प्रशासन के बीच की दूरी कम करने के लिए किया जाता है।
अंत में, अपनी-अपनी समस्याओं के साथ आए ग्रामीण निराश होकर लौट गए। उनका कहना था कि अगर समाधान दिवस में अधिकारी ही नहीं पहुंचेंगे, तो शिकायतों का समाधान कैसे होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में समाधान दिवस को औपचारिकता न बनाकर इसे वास्तव में जनता की सुनवाई का प्रभावी मंच बनाया जाए।
