नई दिल्ली (शिखर समाचार) भारत की संसद को वैश्विक स्तर पर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। यह पहल विश्व के विभिन्न देशों की संसदों के साथ नियमित और सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए की गई है, ताकि पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी भारत के संबंधों को नई ऊर्जा मिल सके।
सांसदों को अंतर-संसदीय संवाद का अवसर
लोकसभा सचिवालय की मीडिया शाखा के अनुसार, इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर भारत एकजुट है। सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे वे अनुभव साझा कर सकेंगे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे।
इन संसदीय मैत्री समूहों में रवि शंकर प्रसाद, पी. चिदंबरम, असदुद्दीन ओवैसी, शशि थरूर, हेमा मालिनी, मनीष तिवारी, ओ’ब्रायन डेरेक, अभिषेक बनर्जी, और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं। मैत्री समूहों का गठन श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस, सऊदी अरब, इज़राइल, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, भूटान, मालदीव और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ किया गया है।
उद्देश्य और वैश्विक महत्व
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इन समूहों के माध्यम से सांसद व्यापार, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, सामाजिक नीतियां और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह पहल द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सक्रिय और आत्मविश्वासी भूमिका को मजबूत करेगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लगातार संसदीय कूटनीति को भारत की वैश्विक छवि सशक्त बनाने का माध्यम बताया है। 60 से अधिक देशों के साथ इन समूहों का गठन भारत के लोकतांत्रिक एकता, राष्ट्रीय प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
